कानपुर में 5 ब्लड बैंकों के लाइसेंस निलंबित, गंभीर अनियमितताएं उजागर

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कानपुर। कानपुर में ब्लड बैंकों की कार्यप्रणाली पर बड़ी कार्रवाई करते हुए पांच प्रमुख ब्लड बैंकों के लाइसेंस निलंबित कर दिए गए हैं। यह कदम रक्त के रखरखाव, भंडारण और अनिवार्य जांच प्रक्रियाओं में गंभीर लापरवाही सामने आने के बाद उठाया गया है। कार्रवाई के बाद अन्य ब्लड बैंकों में हड़कंप मच गया है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन की आयुक्त डॉ. रोशन जैकब के निर्देश पर मार्च के अंतिम सप्ताह में प्रदेशव्यापी विशेष अभियान चलाया गया था। इसी क्रम में कानपुर के विभिन्न ब्लड बैंकों का निरीक्षण किया गया, जिसमें कई गंभीर खामियां उजागर हुईं। जांच के दौरान पाया गया कि कई ब्लड बैंकों में खून को निर्धारित तापमान पर सुरक्षित नहीं रखा जा रहा था। साथ ही, रक्त जांच से जुड़े आवश्यक रिकॉर्ड भी अधूरे या अनुपलब्ध मिले। कई स्थानों पर खून के नमूनों की जांच के दस्तावेज तक प्रस्तुत नहीं किए गए और प्रशिक्षित स्टाफ की भी कमी पाई गई। इन अनियमितताओं के चलते जिन ब्लड बैंकों के लाइसेंस निलंबित किए गए हैं, उनमें आईएमए ब्लड बैंक (परेड), स्वास्तिक ब्लड बैंक (इंद्रानगर), मायांजलि चैरिटेबल ब्लड बैंक (सिविल लाइंस), पुष्पांजलि चैरिटेबल ब्लड एंड कंपोनेंट सेंटर (नौबस्ता) और वाडा चैरिटेबल ब्लड बैंक (कल्याणपुर) शामिल हैं। निलंबन तब तक प्रभावी रहेगा, जब तक ये सभी संस्थान सुधार कर संतोषजनक रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं कर देते। ड्रग इंस्पेक्टर ओमपाल के अनुसार, आयुक्त के निर्देश पर चलाए गए अभियान के तहत ही यह कार्रवाई की गई है। निलंबन अवधि के दौरान ये ब्लड बैंक किसी भी प्रकार का रक्त संग्रहण या वितरण नहीं कर सकेंगे। यदि इनके पास उपलब्ध रक्त की वैधता समाप्त होने के करीब होगी, तो उसे जांच के बाद उर्सला हॉर्समैन मेमोरियल अस्पताल या जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज भेजा जाएगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जनस्वास्थ्य से समझौता किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और नियमों का पालन न करने वालों पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

ये भी मिलीं प्रमुख कमियां:

● आईएमए को छोड़कर अन्य ब्लड बैंकों में संक्रमण की पहचान के लिए अनिवार्य एलाइजा टेस्ट नहीं किए जा रहे थे।

● मरीजों को केवल रैपिड टेस्ट के आधार पर रक्त दिया जा रहा था, जो स्वास्थ्य के लिए जोखिमपूर्ण है।

● खाली ब्लड बैग्स की गुणवत्ता जांच से संबंधित कोई रिपोर्ट उपलब्ध नहीं थी।

● कई स्थानों पर डॉक्टर और प्रशिक्षित टेक्निकल स्टाफ अनुपस्थित मिला।

● परिसर में साफ-सफाई की कमी और अव्यवस्था पाई गई।

● रक्त संग्रहण और वितरण का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं मिला।

● आईएमए ब्लड बैंक में भी रखरखाव और जांच से जुड़े रिकॉर्ड अधूरे पाए गए।


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