कानपुर। साइबर ठगी के एक हाई-प्रोफाइल मामले में क्राइम ब्रांच ने बड़ी कार्रवाई करते हुए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के एक सिपाही को गिरफ्तार किया है। 57 लाख रुपये की ठगी के इस सनसनीखेज मामले में जांच के दौरान सिपाही की भूमिका सामने आई, जिसके बाद उसे ओडिशा से गिरफ्तार कर ट्रांजिट रिमांड पर कानपुर लाया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में पूरे नेटवर्क के तार कंबोडिया से जुड़े होने के संकेत मिले हैं। क्राइम ब्रांच के अनुसार, आरोपी सिपाही दाऊद अंसारी साइबर ठगों को बैंक खाते उपलब्ध कराने का काम करता था। इसके बदले वह प्रति खाता करीब 10 हजार रुपये लेता था। इन्हीं खातों के माध्यम से ठगी की रकम ट्रांसफर कर विदेश भेजी जाती थी। रामबाग निवासी रिटायर्ड असिस्टेंट कमिश्नर इंडस्ट्री भैरव प्रसाद पांडेय ने साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी। उनके मुताबिक ठगों ने खुद को अधिकारी बताकर फोन किया और दावा किया कि उनकी पत्नी के आधार कार्ड से आतंकियों के खाते में 70 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए हैं। ठगों ने गिरफ्तारी का डर दिखाकर उन्हें मानसिक दबाव में लिया। इतना ही नहीं, वीडियो कॉल के जरिए सेना के कैंप जैसा दृश्य दिखाकर विश्वास भी दिलाया। इसके बाद जांच के नाम पर आरटीजीएस के जरिए 57 लाख रुपये विभिन्न खातों में ट्रांसफर करा लिए गए। इस मामले में पहले ही ओडिशा, झारखंड और कानपुर से पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। जांच में सामने आया कि ये सभी केवल मोहरे थे, जबकि असली सरगना विदेश में बैठकर पूरे गिरोह का संचालन कर रहा है। पूछताछ में सिपाही ने कोलकाता के दो युवकों के नाम भी बताए हैं। हालांकि, दोनों के मोबाइल फिलहाल बंद हैं और पुलिस उनकी तलाश में जुटी है। क्राइम ब्रांच की टीम ने ओडिशा के राउरकेला स्थित सीआईएसएफ कैंप पहुंचकर कमांडेंट को गिरफ्तारी मेमो सौंपने के बाद आरोपी को हिरासत में लिया। सोमवार को ट्रांजिट रिमांड मिलने के बाद उसे कानपुर लाया जा रहा है, जहां कोर्ट में पेश किया जाएगा। डीसीपी क्राइम ब्रांच श्रवण कुमार सिंह ने बताया कि आरोपी से पूछताछ में कई अहम सुराग मिले हैं। उम्मीद है कि आगे और बड़े खुलासे होंगे और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भी जल्द गिरफ्तारी की जाएगी।
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