जयपुर,राजस्थान।वासुदेव देवनानी ने कहा कि किसी भी कानून का मसौदा स्पष्ट और सरल भाषा में होना चाहिए, ताकि उसमें जनता की इच्छाएं सही रूप में प्रतिबिंबित हो सकें। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि विधायी मसौदा ही कानून निर्माण की आधारशिला होता है और इसकी गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
वे शनिवार को राजस्थान विधान सभा में आयोजित 37वें अंतरराष्ट्रीय विधायी मसौदा प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस कार्यक्रम में 17 देशों के 43 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
देवनानी ने बताया कि किसी भी विधेयक को पारित करने की प्रक्रिया तीन चरणों से गुजरती है—प्रस्तुतीकरण, विस्तृत चर्चा व परीक्षण, और अंत में मतदान। उन्होंने कहा कि विधेयकों को मजबूत, प्रभावी और जनहितकारी बनाने के लिए विशेषज्ञ समितियों के माध्यम से गहन परीक्षण किया जाता है।
उन्होंने कहा कि राजस्थान विधान सभा लोकतंत्र का सच्चा मंदिर है, जहां सामाजिक सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण कानून पारित किए जाते हैं। इस वर्ष विधानसभा अपनी स्थापना के 75 वर्ष पूरे कर रही है और अब तक लाखों लोगों की अपेक्षाओं को कानून का रूप दिया जा चुका है।
भारत के अमृतकाल की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि देश 2047 तक स्वतंत्रता की 100वीं वर्षगांठ मनाने की दिशा में अग्रसर है, जो आत्ममंथन और बड़े लक्ष्यों को तय करने का समय है।
देवनानी ने यह भी बताया कि राजस्थान विधान सभा ने अपने सभी विधायी अभिलेखों का डिजिटलीकरण कर पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा दिया है। साथ ही विधानसभा का डिजिटल संग्रहालय युवाओं और आमजन को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जोड़ने का सशक्त माध्यम बन रहा है।
कार्यक्रम में विभिन्न देशों से आए प्रतिभागियों ने विधानसभा की कार्यप्रणाली को करीब से देखा और विधायी प्रक्रिया पर चर्चा की। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग सहित कई जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे।




