फतेहपुर।में आशा और आशा संगिनी कार्यकर्ताओं ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार के नाम ज्ञापन सौंपा। उन्होंने मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री से मांग की कि उन्हें राज्य कर्मचारी का दर्जा देते हुए सम्मानजनक वेतन, सामाजिक सुरक्षा और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। उनका कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने में उनकी अहम भूमिका रही है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें पर्याप्त मानदेय नहीं मिल रहा है।
फतेहपुर में आशा और आशा संगिनी कार्यकर्ताओं ने अपनी छह सूत्रीय मांगों को लेकर सरकार के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कहा गया कि प्रदेश में करीब दो लाख आशा और दस हजार आशा संगिनी स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न योजनाओं में कार्यरत हैं। टीकाकरण, जच्चा-बच्चा देखभाल, संस्थागत प्रसव, स्वास्थ्य सर्वेक्षण और स्वच्छता जैसे महत्वपूर्ण कार्यों के बावजूद उन्हें नियमित वेतन नहीं, बल्कि केवल प्रोत्साहन राशि दी जाती है।
कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि आशा वर्कर्स को राज्य कर्मचारी घोषित कर न्यूनतम 18 हजार रुपये तथा आशा संगिनी को 24 हजार रुपये मासिक वेतन दिया जाए। साथ ही जब तक यह व्यवस्था लागू न हो, तब तक वर्तमान प्रोत्साहन राशि को दोगुना किया जाए।
इसके अलावा ईपीएफ और ईएसआई जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ, आशा संगिनी को सुपरवाइजर का दर्जा, 5जी मोबाइल या टैबलेट, निःशुल्क बीमा, दुर्घटना में मृत्यु पर 10 लाख रुपये मुआवजा तथा सेवानिवृत्ति पर 10 लाख रुपये की एकमुश्त राशि देने की भी मांग की गई है।
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