बंदरों का आतंक,बाजार से सब्जी या राशन लेकर लौट रहे राहगीरों के हाथ से छीन लेते हैं झोले और बैग

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बांगरमऊ, उन्नाव।​गंजमुरादाबाद,कस्बे में इन दिनों बंदरों का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि आम नागरिकों का जीना दूभर हो गया है। कस्बे के हर गली-मोहल्ले और मुख्य बाजारों में बंदरों के झुंड ने डेरा डाल रखा है, जिससे हर समय किसी बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है। आए दिन बंदरों द्वारा किए जा रहे हमलों और नुकसान से स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ राहगीर और व्यापारी भी बेहद भयभीत हैं।
​ ​कस्बे के लोगों ने बताया कि बंदर अब न सिर्फ छतों और पेड़ों पर रहते हैं, बल्कि सीधे सड़कों और दुकानों पर धावा बोल देते हैं। सबसे ज्यादा परेशानी दुपहिया वाहन चालकों को उठानी पड़ रही है। मुख्य बाजार या घरों के बाहर खड़ी मोटरसाइकिलों पर बंदरों का झुंड टूट पड़ता है। बंदर पलक झपकते ही मोटरसाइकिल की सीटों के कवर फाड़ डालते हैं। बाजार से सब्जी या राशन लेकर लौट रहे राहगीरों के हाथ से बंदर झोले और बैग छीन लेते हैं। विरोध करने पर वे काटने को दौड़ते हैं। घरों व दुकानों के बाहर रखा सामान उठा ले जाना और उसे नष्ट कर देना अब यहां की रोज की कहानी बन चुका है।
​ ​बंदरों के इस हिंसक रवैये के कारण लोग अपने घरों की छतों पर जाने से भी कतराने लगे हैं। घरों की खिड़कियों और दरवाजों को चौबीसों घंटे बंद रखना पड़ता है। जरा सी लापरवाही होते ही बंदर घरों के भीतर दाखिल होकर रसोई का सामान और कीमती वस्तुएं तहस-नहस कर देते हैं। छोटे बच्चों और बुजुर्गों को अकेले घर से बाहर भेजने में परिजन डरने लगे हैं। ​कस्बे के नागरिकों का कहना है कि इस समस्या को लेकर कई बार स्थानीय प्रशासन और वन विभाग का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया गया है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। बंदरों की बढ़ती संख्या और उनके आक्रामक व्यवहार के कारण कभी भी कोई गंभीर दुर्घटना घट सकती है। ​स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से जल्द से जल्द पिंजरे लगवाकर इन उत्पाती बंदरों को पकड़वाने और इन्हें जंगलों में छुड़वाने की मांग की है, ताकि कस्बे के लोगों को इस भय के माहौल से मुक्ति मिल सके।


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