रुक्मिणी मंगल की कथा में भक्ति का संदेश, सुदामा चरित्र ने भावुक किया

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उन्नाव। फतेहपुर चौरासी क्षेत्र के ग्राम लोनारपुर स्थित माता भुवनेश्वरी सिद्धिपीठ में चल रहे विष्णु महायज्ञ एवं श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन गुरुवार को कथा व्यास ने सुदामा चरित्र और परीक्षित मोक्ष की मार्मिक कथा सुनाई, जिसे सुन श्रद्धालु भावुक हो उठे।
कथा व्यास एवं पीठाधीश्वर नीरज स्वरूप ब्रह्मचारी ने भक्ति और त्याग का महत्व बताते हुए श्रद्धालुओं को धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। इस दौरान उनके गुरु, अखिल भारतीय दंडी संन्यासी परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी ब्रह्माश्रम महाराज ने संन्यास के महत्व और सन्यासी के धर्म पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि पूर्णिमा के अवसर पर ब्रह्मचारी नीरज स्वरूप संन्यास धारण करेंगे।
कार्यक्रम में भागवताचार्य हरिनारायण जी ने रुक्मिणी मंगल की कथा सुनाते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी के मिलन में एक ब्राह्मण की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिन्होंने संदेशवाहक बनकर यह दिव्य संयोग संभव कराया।
कार्यक्रम के दौरान आचार्य शिवम द्विवेदी, अरविंद द्विवेदी, विनय कृष्ण, धर्मेंद्र सहित अन्य आचार्यों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ यज्ञ में आहुतियां दिलाईं।


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