उन्नाव।बांगरमऊ करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी अभी तक सूखी, कब्जा व अतिक्रमणयुक्त कल्याणी नदी का कल्याण नहीं हो सका है। नदी के किनारे वाले किसानों को भरपूर पानी नहीं मिल पा रहा है। वहीं नदी में जलकुंभी खड़ी है, साथ ही नदी की ज्यादातर भूमि पर किसान कब्जा करके खेती कर रहे हैं। अधिकारियों की पहल सिर्फ पन्नों तक ही सीमित रही। जिससे कल्याणी नदी का कल्याण नहीं हो सका। जनपद में कल्याणी नदी का अपना एक अलग ही अस्तित्व है। लगभग 68 से अधिक किमी में फैली कल्याणी नदी का कल्याण अभी तक नहीं हो सका है। नदी के पुनरुद्धार का कार्य शुरू किया गया था लेकिन वह महज कागजों तक ही सीमित रहा। कल्याणी नदी गंजमुरादाबाद ब्लाक से होते हुए बांगरमऊ, फतेहपुर चौरासी, सफीपुर, सिकंदरपुर सरौसी ब्लाक से परियर के पास गंगा में मिलती है।
वर्ष 2022 में तत्कालीन सीडीओ ने कल्याणी नदी पुनरुद्धार के लिए सर्वे शुरू कराया था लेकिन कुछ समय बाद नदी का सर्वे कार्य बंद हो गया।फतेहपुर चौरासी क्षेत्र से निकली कल्याणी नदी में खड़ी जल कुंभी नदी के लिए अभिशाप बन गई
कुछ माह बाद दोबारा कल्याणी नदी को जीवित करने के लिए कार्य शुरू किया गया। लेकिन यह कार्य महज कागजों तक ही सीमित रहा। कल्याणी का ड्रोन सर्वे के साथ-साथ नदी की भूमि को कुछ स्थानों से कब्जा मुक्त भी कराया गया। वहीं नदी से 9.89 लाख क्यूबिक सिल्ट को मशीनों से निकालने का प्रस्ताव किया गया था। साथ ही वर्ष 2025 मई तक कल्याणी नदी को पूर्ण रूप से नया प्रवाह देने के प्रयास थे। लेकिन वह प्रयास असफल ही रहे। अधिकारियों ने नदी को नया स्वरूप देने के लिए कई टेक्नोलॉजी का भी
प्रयोग किया था। मौजूदा समय कल्याणी नदी के अंदर भारी मात्रा में जलकुंभी खड़ी है। वहीं नदी के कई बीघे रकबे में किसानों ने कब्जा कर रखा है और खेती कर रहे हैं। प्रभारी एडीओ पंचायत दीपकांत चोला ने बताया कि इस संदर्भ में अभी कोई जानकारी नहीं है।




