जीव और ब्रह्म का विलास ही महारास है

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उन्नाव।बांगरमऊ क्षेत्र के ग्राम गौरिया कलां में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के षष्ठम दिवस वृंदावन के विख्यात भागवताचार्य पं रामदेव तिवारी ने श्रद्धालु भक्तों को गुह्यतम कथा रासलीला का रसपान कराया। उन्होंने उपदेश दिया कि जीव और ब्रह्म का विलास ही महारास है।

कथा व्यास आचार्य तिवारी ने कहा कि जीव अपने ब्रम्ह से मिलन के लिए आतुर रहता है और जब दोनों का मिलन हो जाता है, इसी को महारास कहते हैं। जब गोपियां दसों इंद्रियों से विकर्मों का त्याग कर परमात्म रस से संतृप्त हो गईं। तब उन्हें परमपिता परमात्मा से साक्षात्कार हो गया।
भगवान कृष्ण की बंशी की विस्तृत व्याख्या करते हुए भागवताचार्य ने कहा कि बंशी अपने वंश अर्थात बांस से अलग हो जाती है और वह तपस्या रूपी अग्नि के द्वारा मूलाधार चक्र से लेकर सहस्त्रा धार तक सातों ग्रंथियों का भेदन करा लेती है, इसी को बांसुरी कहते हैं। यही बंशी भगवान कृष्ण के अधरामृत का पान करती है। इसलिए परमात्मा का सानिध्य प्राप्त करने के लिए भक्त को बंशी बनना पड़ेगा। अंत में आयोजक प्रताप सिंह ने भगवान कृष्ण की आरती कर प्रसाद वितरित किया।


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