नई दिल्ली।18वें सिविल सेवा दिवस के अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने प्रशासनिक सुधारों और डिजिटल शासन में हुई उल्लेखनीय प्रगति को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कारों के लिए आवेदनों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है—जो 2023 में 1,216 थी, वह 2025 में बढ़कर 2,035 तक पहुंच गई।
मंत्री ने बताया कि आईजीओटी कर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर अब 88 लाख से अधिक अधिकारी जुड़ चुके हैं, जहां 2,000 से अधिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं। यह पहल सिविल सेवकों के क्षमता निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
शिकायत निवारण प्रणाली सीपीजीआरएएमएस में भी बड़ा सुधार देखने को मिला है। वर्ष 2014 में जहां लगभग 2 लाख शिकायतों का निपटारा होता था, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 25-30 लाख वार्षिक हो गई है। इनमें से 95 प्रतिशत से अधिक मामलों का समाधान किया जा चुका है और औसत निपटान समय 60 दिनों से घटकर लगभग 12 दिन रह गया है।
पेंशन सुधारों के तहत डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र (DLC) के उपयोग में भी तेजी आई है। केवल 2024 में 40 लाख से अधिक पेंशनभोगियों ने फेस रिकग्निशन आधारित डिजिटल प्रमाण पत्र का उपयोग किया, जबकि कुल उपयोग 10 करोड़ के आंकड़े को पार कर चुका है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने अपने संबोधन में “नागरिक-केंद्रित शासन” की ओर बढ़ते कदमों पर जोर देते हुए कहा कि अब प्रशासन नियम-आधारित से भूमिका-आधारित और व्यक्तिगत से संस्थागत सेवा की ओर अग्रसर है। उन्होंने बताया कि करीब 2,000 पुराने नियमों को समाप्त किया गया है और कई भर्तियों में इंटरव्यू प्रक्रिया भी खत्म की गई है।
उन्होंने यह भी कहा कि सिविल सेवा मूल्यांकन प्रणाली को अब अधिकारियों की व्यक्तिगत प्रोफाइल के बजाय कार्यक्रमों के परिणामों के आधार पर पुनर्गठित किया गया है।
कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। साथ ही प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पी.के. मिश्रा, शक्तिकांत दास, कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन और डीएआरपीजी सचिव निवेदिता शुक्ला वर्मा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
डॉ. सिंह ने कहा कि ये सुधार “अधिकतम पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्धता” सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किए जा रहे हैं और यह बदलाव प्रशासन-केंद्रित शासन से नागरिक-केंद्रित शासन की ओर एक महत्वपूर्ण परिवर्तन है।




