कर्म और स्वभाव की शुचिता से प्राप्त होती है उन्नति -आचार्य अभिषेक

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कानपुर।बाबा महाकाल योग सेवा समिति रजि. के तत्वाधान में स्वरूपनगर के श्रीमहाकालेश्वर मन्दिर में सत्ताइसवें वार्षिकोत्सव पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के षष्ठम दिवस पर आचार्य अभिषेक शुक्ल जी ने कहा कि मनुष्य अपने स्वभाव और व्यवहार में जितना सुधार कर लेता है वह उतना ही उन्नत होता है,स्वभाव और कर्मों की शुचिता ही उन्नति या उत्थान है तथा इसके विपरीत स्वभाव और कर्मों में दोषों की प्रचुरता ही अवनति या पतन का कारण है,अतः व्यक्ति को कर्म और स्वभाव की शुचिता अवश्य रखनी चाहिए,शुभकर्मों के संयोग से जीव को देवत्व की प्राप्ति होती है,शुभ और अशुभ दोनों के सम्मिश्रण से मनुष्य योनि में जन्म होता है,तामसिक कर्मों के आचरण से जीव पशु,पक्षी,आदि की योनि में जन्म ग्रहण करता है और जिसने केवल पाप का ही संग्रह किया है वह नरकगामी होता है,अतः हम सभी मनुष्य जीवन में सदाचार धारण करें,रुक्मिणी विवाह की कथा सुनाई, परशुराम जयंती अच्छे तीजा के महापर्व पर प्रमोद तिवारी मनीषा तिवारी जी ने मंदिर में भक्तों के लिए वाटर कूलर लगवाया। इस अवसर पर आयोजक मन्दिर प्रबंधक ज्योतिषाचार्य नरेन्द्र शास्त्री , समिति महामंत्री वीरेंद्र मिश्रा, जल निगम प्रदेश महामंत्री विपिन बाजपेई,अनीता अग्रवाल आदि विविध श्रद्धालु उपस्थित रहे।


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