सनातन धर्म समाज के अन्तिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को भी गले लगाती हैं

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बांगरमऊ,उन्नाव।आज के बे सिर पैर की बात करके राजनेता जातियों में सामाजिक विघटन डालकर सनातन संस्कृति को नष्ट करने पर तुले हुए हैं। जबकि सनातन संस्कृति सामान्य से लेकर अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को गले लगाने का काम सदा से करती आ रही है।
यह उदगार नगर में स्थित बाबा बोधेश्वर धाम परिसर में चल रही श्री मद्भागवत कथा सप्ताह में कथावाचक पण्डित राम देव शास्त्री ने व्यक्त किया , उन्होंने बताया भगवान श्री कृष्ण की अनन्य भक्त मीरा के गुरु रैदास यानी भक्त रविदास जी,गोहत्या के पाप से मुक्ति के लिए आज के सफाई कर्मी मूलतः जमादार से कमर पर लात मरवाने का विधान है,,राजा हरिश्चंद्र को डोम ने खरीद लिया,, बांगरमऊ बाला देवी में पासी विरादरी के पुजारी,मलेहटी देवी मंदिर मल्हपुर चहलहा में रैदास विरादरी के पुजारी के द्वारा देवी मंदिरों में दशकों सेपूजन अर्चन कर रहे हैं। इन लोगों का समाज में आदर भी है । सबको रोजी-रोटी के साथ सामाजिक, धार्मिक कार्यों में सबको समान एवं बराबरी का अधिकार मिला हुआ है। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि विडंबना यह है कि सनातन को गाली देने वाले लोग रामायण जलाते है, मनुस्मृति जलाते हैं,यह भी एक तरह का आतंकवाद है। धर्म ग्रंथों में लिखी हर बात सनातन में ग्राह्य नहीं होती है। यहां विमर्श है। जबकि अन्यत्र पंथ , मज़हब ,रिलीज़न में विमर्श तर्क की कोई गुंजाइश नहीं है । सनातन में सब नर करहि परस्पर प्रीती,चलहि स्वधर्म निरत श्रुति नीती।। की भावना से काम करते हैं जैसे कुम्हार के चाक के पास रखी हुई मिट्टी में यह कहना कठिन है कि इस मिट्टी में सुराही , कुल्हड़ ,चिलम आदि में क्या निर्माण हो सकता है ये नाम भी मिट्टी के रख दिए जाते हैं।


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