डीएम गौरांग राठी ने मामले की जांच के लिए गठित की टीम,लगभग 2 करोड़ रुपए की कोडिन सीरप अवैध तरीके से बेच दी गई जिले में और औषधि विभाग अंजान बना बैठा रहा

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उन्नाव।डीएम गौरांग राठी ने जिले में चल रही कोडीन की कालाबाजारी के मामले को संज्ञान में लेकर दो सदस्यीय टीम गठित कर दी है। जिसे शुक्रवार को औषधि निरीक्षक अशोक कुमार के साथ बांगरमऊ जांच के लिए भेजा गया। लगभग 2 करोड़ रुपए की अवैध बिक्री कर दी गई कोडिन सिरप जिस पर विभाग अनजान बन बैठा रहा। बीते दिनों रायबरेली और लखनऊ से मिले इनपुट और निर्देश के बाद नींद से जागे औषधि विभाग ने बांगरमऊ स्थित अंबिका फार्मा का निरीक्षण किया जहां पर उन्हें रायबरेली और लखनऊ से लाई गई लाखों की संख्या में कोडिन सीरप की बिक्री का कोई अभिलेख नहीं मिला। इसके बाद औषधि निरीक्षक नें कारण बताओं नोटिस जारी कर खानापूर्ति कर दी। इसके बाद आरोपी फर्म संचालक अजय कुमार अपना बुरिया बिस्तर समेट कर फरार हो गया। मामला उच्च अधिकारियों तक पहुंचा तो आनन-फानन में संबंधित कोतवाली में एफआईआर दर्ज करा दी गई। मामला मीडिया में आया तो औषधि निरीक्षक ने तेजी दिखाते हुए उसके भाई अरुण कुमार जो की अजय मेडिकल स्टोर के नाम पर रिटेल दुकान चल रहा है। वहां पर पहुंचकर दुकान के बाहर पुलिस कर्मियों के साथ नोटिस चश्पा कर फोटो खींच मीडिया को दे दी। जब मीडिया ने तीन दिन बीत जाने के बाद औषधि निरीक्षक से नोटिस के बाबत एफआईआर दर्ज करायें जाने की बात कही तो औषधि निरीक्षक में अगली कहानी रच दी की जिस दुकानदार अजय मेडिकल स्टोर को नोटिस दी गई है। उसका लाइसेंस नंबर और जो लखनऊ की इधिका लाइफसाइंसेज प्रा. लि. द्वारा कोडिन सीरप बिक्री की गई है। उस बिल के लाइसेंस नंबर में अंतर पाया गया है। इसका मतलब अजय मेडिकल स्टोर संचालक अरुण कुमार निर्दोष है, औषधि निरीक्षक ने नोटिस भी दे दी और पुलिस की तरह जांच कर आरोपी को निर्दोष भी साबित कर दिया। अब बात यहां फस गई कि जब आप जांच करने अजय मेडिकल स्टोर पर गए थे तो क्या आपने उसका लाइसेंस नंबर नहीं देखा था या जो लाइसेंस नंबर या इनपुट लखनऊ से इनवॉइस प्राप्त हुई थी। उसका मिलान नहीं किया था इतनी बड़ी लापरवाही इतने गंभीर मामले में औषधि निरीक्षक को जांच के घेरे में लाकर खड़ी कर देती है लगातार मीडिया द्वारा छापे जाने के बाद डीएम गौरांग राठी ने मामले का संज्ञान लिया और पारदर्शी जांच के लिए दो सदस्य टीम गठित कर जांच के लिए शुक्रवार को औषधि निरीक्षक के साथ बांगरमऊ भेज दिया पूरे घटनाक्रम में औषधि निरीक्षक की भूमिका संदिग्ध बनी हुई है। क्योंकि नोटिस देने के बाद 13 दिनों तक किस बात का इंतजार करते रहे, औषधि निरीक्षक जबकि आरोपी द्वारा करोड़ों रुपए की कोडिन सीरप बिक्री और खरीद का सटिक इनपुट था।


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