बांगरमऊ,उन्नाव।श्री गणेश महोत्सव के पावन अवसर पर बांगरमऊ के खत्रियाना मोहल्ला मे हो रही श्रीमद भागवत तथा गणेश कथा के पांचवे दिन राधा अष्टमी के अवसर पर बोलते हुए पूज्य श्री रूद्र कृष्ण जी महाराज ने बताया कि हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधा अष्टमी पड़ती है। इस तिथि पर ही राधा रानी का जन्म हुआ था। राधा-कृष्ण भक्तों के लिए राधा अष्टमी का दिन बेहद ही खास होता है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की तरह ही राधा रानी का जन्मोत्सव भी बड़े ही धूम-धाम से मनाया जाता है। जन्माष्टमी की तरह राधाष्टमी का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन विवाहित महिलाएं संतान सुख और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए व्रत रखती हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार जो लोग राधा रानी जी को प्रसन्न कर लेते हैं। उनसे भगवान श्री कृष्णा अपने आप प्रसन्न हो जाते हैं। कहा जाता है कि व्रत करने से घर में मां लक्ष्मी आती है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। राधा रानी के बिना भगवान श्री कृष्ण की पूजा भी अधूरी मानी जाती है। इसलिए राधा अष्टमी का त्योहार भी कृष्ण जन्माष्टमी की तरह बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। उक्त अवसर पर वृन्दावन से आये संगीत कलाकार देवेश,कपिल, आदि ने भजनों को गाकर कार्यक्रम और सुन्दर बना दिया। महाराज जी ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार राधा अष्टमी के दिन राधा रानी के 28 नामों का अधिक से अधिक जप करना चाहिए। राधा रानी के नामों का जप करने से जीवन के सभी दुख-कष्टों से छुटकारा मिलता है और राधा रानी अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करती है। राधा अष्टमी के पावन दिन राधाजी को प्रसन्न करने के लिए उनके 28 नामों का जाप अवश्य करें। जिस व्यक्ति पर राधा रानी की कृपा हो जाती है उस पर श्री कृष्ण के साथ ही सभी देवी-देवताओं की कृपा भी बरसती है।
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