रमजान शुरू होते ही पढ़ी जाती है तरावीह की नमाज

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उन्नाव।चांद निकल आने की तस्दीक के बाद सभी मस्जिदों में नमाजियों के लिए तरावीह नमाज का सिलसिला शनिवार से ही शुरू हो गया। रमजान के पाक महीने में तरावीह की नमाज अदा की जाती है। रमजान में तरावीह नमाज़ की बहुत फजीलत होती है, हर रोजेदार रोजा रखने के साथ ही रात में तरावीह की नमाज भी पढ़ते हैं। हर मस्जिद में रमजान के पूरे महीने में तरावीह की नमाज पढ़ी जाती है। लेकिन अलग-अलग मस्जिदों में 5 दिन, 7 दिन, 10 दिन और 15 दिन में भी कुरआन पाक तरावीह की नमाज में मुकम्मल किया जाता है। जिन मस्जिदों में कुरआन पाक मुकम्मल हो जाता है फिर वहां सूरतों के साथ तरावीह की नमाज पढ़ी जाती है। तरावीह की 20 रकात नमाज होती है जो ईशा की 17 रकात नमाज के साथ ही पढ़ाई जाती है। इस तरह कुल 37 रकात नमाज रात में पढ़ी जाती है।

रमजान के इस मुबारक पाक महीने में अल्लाह की खूब इबादत की जाती है। रमजान में पूरे महीने लोग रोजा रखकर पांच वक्त की नमाज और जकात आदि अदा करते हैं। वैसे तो मुसलमान हर दिन 5 वक्त की नमाज अदा करते हैं। लेकिन रमजान के महीने में तरावीह की विशेष नमाज भी पढ़ी जाती है। तरावीह की नमाज केवल रमजान में ही पढ़ी जाती है। रमजान का चांद दिखाई देते ही सभी मस्जिदों में नमाजियों की तादाद काफी बढ़ गई है। तरावीह की नमाज 20 रकत की होती है और यह नमाज को 2-2 रकात करके पढ़ी जाती है और जब 4 रकात पूरी हो जाती है तो सलाम फेर कर उसी सूरत में बैठकर दुआ पढ़ी जाती है।
नगर के मोहल्ला गुलाम मुस्तफा (गोल कुआं) की हुसैनी मस्जिद के पेश इमाम मौलाना मोइनुद्दीन कादरी ने बताया कि रमजान महीने के 29 या 30 दिनों को तीन भागों में बांटा गया है, जिन्हें अशरा कहा जाता है। इसमें पहला अशरा रहमत का, दूसरा अशरा मगफिरत का (गुनाहों की माफी) और तीसरा अशरा जहन्नुम की आग से खुद को बचाने के लिए होता है। उन्होंने कहा कि रमजान का पाक महीना इबादत के लिए होता है। माहे रमजान में मुसलमानों को खैर का काम, नेकी, सदका, जकात, खैरात जैसे कामों को करने के साथ ही रोजा रखने और नमाज भी पूरी पाबंदी के साथ पढ़नी चाहिए।


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