बांगरमऊ, उन्नाव।नगर के ऐतिहासिक बोधेश्वर महादेव मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पंचम दिवस भागवताचार्य पंडित रामदेव शास्त्री ने रहस्यमय रास लीला की कथा का वर्णन कर श्रोता भक्तों को निर्विकार स्थित में पहुंचा दिया। उन्होंने बताया कि गोपियों का कृष्ण के साथ रासलीला वस्तुत: जीव और ब्रह्म का मिलन है।
भागवताचार्य श्री शास्त्री ने बताया कि देश का वातावरण शुद्ध हुआ और साथ ही आत्मा में पवित्रता आई। तब भगवान कृष्ण ने ज्ञान रूपी वंशी बजाई। वासना रहित पवित्रात्मा गोपियों ने रसीली ध्वनि सुनते ही अर्धरात्रि के समय कृष्ण से मिलने आ पहुंचीं। सभी गोपियों ने भगवान कृष्ण से कहा कि सांसारिक विषयों को छोड़कर आपके चरणो में आई हूं। जैसे मोक्ष की इच्छा करने वाली आत्मा को परमपिता परमात्मा अपना लेते हैं। वैसे ही आप हम सब गोपियों को अपना लीजिए। कृष्ण की दया-दृष्टि से आत्मा का परमात्मा के साथ मिलन हो गया। वहीं पार्वती की कृपा से गोपी का वेश धारण कर रासलीला में पहुंचे शिवजी भी गोपीश्वर कहलाए।




