पांच दीपोत्सव पर्व 18 अक्टूबर से प्रारम्भ हो 23 तक मनाया जाएगा,आचार्य ऋषि कान्त मिश्र शास्त्री ऊगू

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बांगरमऊ, उन्नाव।भारतीय संस्कृति सनातन धर्म का पांच द्विवसीय दीपावली पर्व का धन त्रयोदशी शनिवार दिनांक १८ अक्टूबर से प्रारंभ होकर २३ अक्टूबर दिन गुरुवार तक यह रहेगा। धनतेरस का प्रसिद्ध पर्व प्रदोष काल में त्रयोदशी मिलने के कारण १८ अक्टूबर को धन ऐश्वर्य की वृद्धि की कामना से विधिवत पूजन तथा धन्वंतरि जयंती के शुभ अवसर पर की जाएगी।
यह जानकारी देते हुए आचार्य ऋषि कांत मिश्र शास्त्री ने बताया कि काशी विश्व पंचांग शास्त्रीय मान्यता अनुसार धन्वंतरि एवं लक्ष्मी इन्द्र कुबेर का पूजन चिकित्सा संबंधी प्रतिष्ठानों में करने का सर्वोत्तम काल ६/५८ से ८/५६ बजे के मध्य सोना चांदी पीतल तांबा धातु के पात्र खरीद कर वर्ष भर लक्ष्मी जी की कृपा प्राप्त होती रहेंगी। इसी दिन संतान सुख समृद्धि के लिए शनि प्रदोष व्रत किया जायेगा।यम दीप दान अपने घर के बाहर कर यमराज को प्रसन्न कर रोग कष्ट आधी व्याधि का शमन होता है । २९ अक्टूबर को हनुमत जयंती एवं नरक चतुर्दशी मास शिवरात्रि व्रत पर्व मनाया जाएगा।आज के दिन हनुमान जी के दर्शन करने से तीनों पापों का शमन होता है।
विश्व प्रसिद्ध दीपावली पर्व प्रदोष व्यापिनी अमावस्या तथा निशीथ कालीन अमावस्या में २० अक्टूबर सोमवार को ही मनाया जाएगा सभी व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर पूजन तथा घर पर गणेश लक्ष्मी पूजा शुभ मुहूर्त तीन विशेष रहेगे सायं काल १९ /९ से ९/१३ बजे तक दिन में स्थिर लग्न २/१३ बजे से ३/४४ बजे तक एवं रात्रि सिंह लग्न में मंत्र तंत्र यंत्र साधना का शुभ मुहूर्त रात्रि १/१९ से ३/३३ बजे के मध्य किया जायेगा तथा प्रातः काल में ही सूप बजाकर दरिद्र निस्तारण किया जायेगा।


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