राजस्थान कृषि में नई ऊंचाइयों की ओर, ईसबगोल व दुग्ध उत्पादन बढ़ाने पर जोर

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जयपुर। राजस्थान में कृषि क्षेत्र को अधिक लाभकारी और आधुनिक बनाने के लिए राज्य सरकार लगातार प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि राज्य ईसबगोल उत्पादन में देश में प्रथम स्थान पर है और अब इसे प्रोसेसिंग यूनिट्स के माध्यम से और अधिक लाभकारी बनाया जाएगा। इसके साथ ही दुग्ध उत्पादन बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में सिंचाई और पेयजल के लिए राम जल सेतु लिंक परियोजना, यमुना समझौता, आईएनजीपी, गंगनहर तथा सोम-कमला-अम्बा जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनसे किसानों को सीधा लाभ मिल रहा है।
उन्होंने किसानों से अपील की कि वे पारंपरिक खेती के बजाय वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाएं, आधुनिक कृषि तकनीकों का उपयोग करें और सिंचाई के लिए फव्वारा सिस्टम को अपनाएं। साथ ही पारंपरिक फसलों के साथ आधुनिक फसलों को शामिल करने की भी बात कही। मुख्यमंत्री ने रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग पर चिंता जताते हुए मृदा स्वास्थ्य कार्ड के अनुसार ही खाद का प्रयोग करने की सलाह दी, ताकि भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहे।
कृषि के साथ पशुपालन को जोड़ने पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि इससे प्राकृतिक खाद की उपलब्धता बढ़ेगी, लागत में कमी आएगी और किसानों की आय में वृद्धि होगी।
मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि 25 माह के कार्यकाल में 35 हजार 368 फार्म पॉन्ड बनाए गए हैं, जबकि पिछली सरकार ने इसी अवधि में केवल 8 हजार 152 फार्म पॉन्ड बनाए थे। वर्तमान सरकार ने फार्म पॉन्ड पर किसानों को 303 करोड़ रुपये का अनुदान दिया, जबकि पिछली सरकार ने 48 करोड़ रुपये ही दिए थे। इसके अलावा तारबंदी, शेडनेट हाउस, स्वामित्व कार्ड वितरण, डिग्गी निर्माण और गोशालाओं को सहायता जैसे कार्यों में भी उल्लेखनीय प्रगति की गई है।
इस अवसर पर केंद्रीय और विभिन्न राज्यों के कृषि मंत्री, अधिकारी, कृषि विशेषज्ञ तथा बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।


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