उन्नाव।सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम, 2005 नागरिकों को सरकार से सवाल पूछने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने का एक शक्तिशाली हथियार देता है। इस अधिनियम की धारा 6 (1) वह आधारशिला है, जो किसी भी नागरिक को जानकारी प्राप्त करने के लिए आवेदन करने का अधिकार देती है।
उच्च न्यायालय खंडपीठ लखनऊ के वरिष्ठ यश भारतीय अधिवक्ता व प्रमुख समाजसेवी फारूक अहमद एडवोकेट ने एक खास बातचीत में बताया कि सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 6 की उपधारा (1) के अनुसार, कोई भी व्यक्ति जो इस अधिनियम के तहत कोई जानकारी प्राप्त करना चाहता है, वह एक लिखित अनुरोध या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से आवेदन कर सकता है। आवेदक अपनी पसंद के अनुसार हिंदी, अंग्रेजी या उस क्षेत्र की आधिकारिक भाषा में आवेदन लिख सकता है। आवेदन संबंधित सार्वजनिक प्राधिकरण के ‘केंद्रीय जन सूचना अधिकारी’ (CPIO) या ‘राज्य जन सूचना अधिकारी’ (SPIO) को संबोधित होना चाहिए। आवेदक को उस जानकारी का स्पष्ट विवरण देना चाहिए जिसे वह प्राप्त करना चाहता है। अधिनियम की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि धारा 6(2) के तहत आवेदक से यह नहीं पूछा जा सकता कि वह जानकारी क्यों मांग रहा है। उसे केवल अपनी संपर्क जानकारी (जैसे नाम और पता) देनी होती है ताकि उससे संपर्क किया जा सके। धारा 6(1) के तहत प्रक्रिया अत्यंत सरल रखी गई है ताकि आम नागरिक बिना किसी कानूनी पेचीदगी के इसका उपयोग कर सके। आप एक सादे कागज पर अपना आवेदन लिख सकते हैं। आवेदन के साथ निर्धारित शुल्क (आमतौर पर ₹10) जमा करना होता है। गरीबी रेखा से नीचे (BPL) के आवेदकों के लिए यह पूरी तरह निःशुल्क है। केंद्र सरकार और कई राज्य सरकारों ने RTI पोर्टल लॉन्च किए हैं, जहाँ धारा 6(1) के तहत डिजिटल रूप से आवेदन किया जा सकता है। यदि कोई व्यक्ति अपनी शारीरिक अक्षमता या निरक्षरता के कारण लिखित आवेदन देने में असमर्थ है, तो धारा 6(1) के तहत जन सूचना अधिकारी (PIO) की यह जिम्मेदारी है कि वह उस व्यक्ति को अपना अनुरोध लिखित रूप में दर्ज करने में हर संभव सहायता प्रदान करे। RTI अधिनियम की धारा 6(1) लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह सुनिश्चित करती है कि सूचना प्राप्त करने की प्रक्रिया किसी भी व्यक्ति के लिए बोझिल न हो। यदि आप किसी सरकारी विभाग के कामकाज, खर्च या निर्णय के बारे में जानना चाहते हैं, तो आप बस इस धारा का उपयोग करके एक आवेदन दे सकते हैं।पारदर्शिता ही जवाबदेही की जननी है। RTI का सही उपयोग एक सजग नागरिक की पहचान है।




