उन्नाव।माहे रमज़ान मुबारक का महीना मुसलमानों के लिए बहुत ही बरकतों, रहमतों और मग़फिरत का महीना होता है। इस मुक़द्दस महीने में अल्लाह तआला अपने बंदों पर खास रहमतें नाज़िल फरमाता है। मुसलमान इस महीने में रोज़ा रखते हैं, नमाज़ों की पाबंदी करते हैं, कुरआन-ए-पाक की तिलावत करते हैं और नेकी के कामों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। इन्हीं बरकतों में से एक बड़ी बरकत तरावीह की नमाज़ में कुरआन-ए-पाक का मुकम्मल सुना जाना यानी तकमीले-कुरआन भी है, जो ईमान वालों के लिए बहुत खुशी और सवाब का मौका होता है।
इसी सिलसिले में बांगरमऊ नगर के बाईपास पुलिया के निकट स्थित महमूदिया मस्जिद में माहे रमज़ान की बरकतों के साथ तरावीह की नमाज़ के दौरान कुरआन-ए-पाक की तकमील का मुक़द्दस प्रोग्राम अंजाम पाया। इस मुबारक मौके पर हाफ़िज़ व क़ारी मोहम्मद जावेद साहब क़िबला ने रमज़ान की बीसवीं शब में तरावीह की नमाज़ में मुकम्मल कुरआन-ए-पाक सुनाकर तकमील की सआदत हासिल की। यह मुबारक लम्हा वहां मौजूद तमाम लोगों के लिए बेहद खुशी और रूहानी सुकून का सबब बना।
इस नेक और मुबारक महफ़िल में कई मशहूर और मक़बूल हस्तियों की शिरकत भी रही। इनमें हज़रत हाफ़िज़ व क़ारी अब्दुल मुबीन साहब क़िबला, मौलाना ज़ीशान साहब, हाफ़िज़ यूसुफ मलिक, हाफ़िज़ अल्ताफ, मौलाना रिज़वान, और मौलाना सैफ रज़ा, हाफिज दिलशाद समेत कई उलमा और हाफ़िज़-ए-कुरआन शरीक हुए। इन तमाम बुज़ुर्गों और उलमा-ए-किराम ने इस मुबारक मौके पर मौजूद आम और खास हज़रात को नसीहत और वअज़ फरमाया।
उन्होंने अपनी तक़रीरों में उम्मत-ए-मोहम्मदिया को नमाज़ की पाबंदी, रोज़े की अहमियत, कुरआन-ए-पाक की तिलावत की फज़ीलत, वालिदैन की खिदमत और उनकी इताअत की ज़रूरत, उलमा-ए-किराम के अदब व एहतराम और छोटे-बड़े सबका अदब करने की ताकीद फरमाई। उलमा-ए-किराम ने फरमाया कि अगर इंसान इन बातों को अपनी ज़िंदगी में शामिल कर ले तो उसकी दुनिया और आख़िरत दोनों संवर सकती हैं। प्रोग्राम के आखिर में मस्जिद की कमेटी के ज़िम्मेदार हज़रात ने भी अपनी खुशी का इज़हार किया। मस्जिद कमेटी के सदर जनाब अरसलान ख़ान साहब, कमेटी सेक्रेटरी जनाब मुईन रज़ा, और कमेटी के मेंबर शाहरुख़ ख़ान, अयाज़ अंसारी, जनाब अनीस उर्फ़ हीरो, ज़ैद ख़ान, मोहम्मद अहमद, और साहिब आलम एडवोकेट समेत बड़ी तादाद में लोगों ने मिलकर हाफ़िज़ व क़ारी मोहम्मद जावेद साहब क़िबला को तोहफ़ों और तहरीफ़ात से नवाज़ा और उनकी मेहनत व खिदमत की कद्र की।
इस तरह यह रूहानी और मुबारक प्रोग्राम बहुत ही अच्छे माहौल में अंजाम पाया। आखिर में मुल्क की सलामती और खुशहाली के लिए खास दुआ की गई। अल्लाह तआला से दुआ की गई कि वह हमारे प्यारे मुल्क हिंदुस्तान को अमन, सुकून और तरक़्क़ी अता फरमाए और हमें दीन-ए-इस्लाम पर सच्चे दिल से चलने की तौफ़ीक़ अता फरमाए।
दुआ है कि अल्लाह तआला मुल्क हिंदुस्तान को हमेशा सलामत रखे।




