उन्नाव।जिला अधिकारी गौरांग राठी का सख्त तेवर देखते हुए अधिक्षक के खिलाफ होगी कार्रवाई ।सफीपुर सीएचसी में दवा जलाने कांड! अधीक्षक और फार्मासिस्ट की कुर्सी हिली सीएमओ ने की सख्त कार्रवाई
सफीपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सरकारी दवाओं को जलाने का मामला तूल पकड़ चुका है। प्राथमिक जांच में सीएचसी अधीक्षक डॉ. राजेश वर्मा और चीफ फार्मासिस्ट प्रेमशंकर की लापरवाही सामने आने पर सीएमओ डॉ. सत्यप्रकाश ने दोनों को तत्काल प्रभाव से सीएमओ कार्यालय से संबद्ध कर दिया है।
यह कार्रवाई निदेशक परिवार कल्याण डॉ. पवन के आदेश के बाद हुई, जिन्होंने घटना पर गंभीर रुख अपनाते हुए रिपोर्ट तलब की थी।
जांच में खुलासा – लाखों की सरकारी दवाएं राख में बदलीं!
दो एसीएमओ — डॉ. एच.एन. प्रसाद और डॉ. आर.के. गौतम — ने मौके पर पहुंचकर जांच की तो हैरान करने वाले तथ्य सामने आए। अस्पताल परिसर में पड़ी जली और अधजली दवाओं के ढेर ने पूरे विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए।
जांच टीम ने मौके से सभी जली-अधजली दवाओं को कब्जे में लिया और उनके बैच नंबर के आधार पर यह पता लगाने का निर्देश दिया कि कौन सी दवा कब और कितनी मात्रा में सफीपुर सीएचसी को जारी की गई थी।
एसीएमओ पहुंचे तो चल रहा था “सबूत मिटाने” का खेल
जांच टीम के पहुंचने से पहले ही अस्पताल प्रशासन ने जली दवाओं को हटवाने की कवायद शुरू कर दी थी। लेकिन तभी एसीएमओ डॉ. एच.एन. प्रसाद और डॉ. आर.के. गौतम मौके पर पहुंच गए। उन्हें देखते ही सफाई में जुटे कर्मचारी वहां से भाग खड़े हुए।
डॉ. प्रसाद ने बताया कि मौके पर कई प्रकार की जली-अधजली दवाएं मिलीं — जिनके रैपर और सैंपल सील कर लिए गए हैं।
कौन-कौन सी दवाएं बनीं राख
* कैल्शियम व विटामिन D3: हड्डियों के लिए आवश्यक
* आयरन, फोलिक एसिड टैबलेट: खून की कमी में दी जाती हैं
* लेवोनोर्गेस्ट्रेल: गर्भनिरोधक दवा
* पैरासीटामोल टैबलेट व सीरप: बुखार में उपयोगी
* मेट्रोनिडाजोल टैबलेट व सीरप: दस्त में दी जाती है
* विटामिन A सीरप: बच्चों को रतौंधी से बचाने के लिए
स्थानीय दवा कारोबारियों का कहना है कि खुले बाजार में इन दवाओं की कीमत लाखों में है। लगभग 15 गत्ते दवाओं के जलने की आशंका जताई जा रही है। डीएम का अल्टीमेटम – तीन दिन में रिपोर्ट, दोषी तो निलंबन तय!
डीएम गौरांग राठी ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए सीएमओ को तीन दिन में जांच पूरी करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने साफ कहा अगर दोषी पाए गए तो निलंबन की कार्रवाई से कोई नहीं बचेगा।”
फैमिली वेलफेयर की दवाएं भी जलीं, विभाग में हड़कंप
विभागीय सूत्रों के मुताबिक, जली दवाओं में परिवार कल्याण कार्यक्रम से जुड़ी दवाएं भी शामिल हैं। यही वजह है कि निदेशक परिवार कल्याण ने भी सीएमओ से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में दवाएं मरीजों तक पहुंचने के बजाय आग के हवाले की गईं। जांच जारी है, पर सवाल यह है।डिप्टी सीएम/ स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक क्या मामले को लेंगे संज्ञान ?




