अहंकार ही भगवान का भोजन है गोवर्धन कथा के प्रसंग में कथावाचक ने बताई महिमा

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बांगरमऊ, उन्नाव।नगर के मोहल्ला खत्रियाना में स्थित महिला मंडल सत्संग भवन में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में सोमवार की रात्रि वृंदावन के विख्यात भागवताचार्य भारत भूषण जी महराज ने भगवान कृष्ण के अपनी उंगली पर गोवर्धन पर्वत धारण करने की सरस कथा का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि घमंड भगवान का भोजन है।
कथा व्यास श्री भूषण जी महराज ने कहा कि राजा इंद्र वृंदावन की कुंज गलियों में गोवंश के साथ विचरण कर रहे भगवान श्रीकृष्ण को पहचान नहीं सके। इंद्र का घमंड चूर-चूर करने के लिए ही श्री कृष्ण ने गोप-ग्वालों से इंद्र की पूजा का निषेध कर श्री गोवर्धन महाराज की पूजा का आयोजन किया। तब क्रोधित होकर इंद्र ने अति वृष्टि कराई। भगवान ने गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर धारण कर गोप-ग्वालों को तेज वर्षा से बचाया और इंद्र का घमंड तोड़ा।
श्री गोवर्धन महाराज की पूजा और 56 भोग की प्रसादी में क्षेत्रीय विधायक श्रीकांत कटियार भी पहुंचे और उन्होंने गिरिराज जी का पूजन-अर्चन कर व्यास जी को सम्मानित किया। बाद में यजमान अशोक रस्तोगी सहित चौ रमेश सिंह गुड्डू, चौ कमलेश सिंह कमलू , कृष्ण कुमार रस्तोगी व डॉ नीरज गुप्ता आदि ने विधायक श्री कटियार को अंग वस्त्र पहनाकर भव्य स्वागत एवं अभिनन्दन किया। गोवर्धन पूजा में शरद अग्रवाल ,डॉ प्रदीप रस्तोगी, पंडित राजकुमार द्विवेदी, पंडित सतीश चंद्र त्रिपाठी भागवताचार्य व पंडित संजीव दीक्षित आदि सहित सैकड़ों श्रोता भक्त मौजूद रहे।


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