जानकीकुंड से प्रारम्भ होने वाली चौदह कोशीय परिक्रमा शुरू

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उन्नाव।फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को परियर जानकीकुंड से प्रारम्भ होने वाली चौदह कोशीय परिक्रमा में हजारों जत्थों की तादात में महिलाओं ने परिक्रमा प्रारम्भ कर माता जानकी व बाबा बलखंडेस्वर महादेव के दर्शन किये।इस परिक्रमा का समापन तीसरे दिन बिठूर में होता है।

फाल्गुन माह के दशमी को चली आ रही परंपरागत तरीके से चौदह कोशीय पैदल परिक्रमा में जानकी कुंड की परिक्रमा कर बिठूर तीर्थ की ओर प्रस्थान किया।
जानकीकुंड आश्रम के पुजारी बड़कऊ दीक्षित व अनुराग त्रिपाठी ने बताया मान्यता के अनुसार फाल्गुन माह की दशमी को जानकी कुंड से प्रारम्भ होकर बिठूर होते हुए बड़े हनुमान तक लोग चौदहकोशीय परिक्रमा पैदल पूरी करते है जिसके बाद वापसी में बिठूर आकर ब्रम्हवर्त खूंटी पर दीपक जलाकर गंगा जी से जल लेकर घर के लिए वापस हो जाते है।
जानकी कुंड में परिक्रमा के दौरान लोग बांस की छड़ी लेकर परिक्रमा करते है लोगो का मानना है ऐसा करने से वंश व्रद्धि होती है और समृद्धि प्राप्त होती है।मान्यता है कि भगवान राम ने जब सीता का परित्याग किया तो उनको यही बल्यमिकी आश्रम में आश्रय मिला था। यही पर लव व कुश का जन्म हुआ था।
अन्य वर्षो की तुलना में इस वर्ष परिक्रमा के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी।बिठूर से परियर तक कई जगहों पर भंडारा व प्रसाद वितरण पूरे दिन चलता रहा। इस पैदल परिक्रमा मेले में महिलाओं की संख्या अधिक रहती हैं।जानकीकुंड पहुची राम दरबार और लड्डू गोपाल की रथ यात्रा।अति प्राचीन बाल हनुमान मंदिर बिठूर से भव्य राम दरबार व लडडू गोपाल का डोला ,रामदरबार,राधा कृष्ण,भोले बाबा की झांकी रथ यात्रा डी जे, बैंड बाजा,डोल के साथ बिठूर मंदिर से होते हुए परिक्रमा के दौरान परियर बाबा बलखंडेश्वार मंदिर होते हुए जानकी कुंड आश्रम पहुची।जिसमें जगह जगह रथ में मौजूद राम दरबार , लड्डू गोपाल की लोगो ने पूजा अर्चना आरती की। जिसके बाद परिक्रमा पूरी कर वापस बिठूर पहुची।इस रथ यात्रा में मुख्य रूप से विमल दीक्षित,रविशंकर मिश्रा, शनि मोघे ,अंकुर,प्रसून,रजनी दीक्षित,प्रवीण,देवीप्रसाद,दिलीप मौजूद रहे।


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