चित्तौड़गढ़,बागुण्ड। विश्व प्रसिद्ध श्री सांवरिया सेठ के प्राकट्य स्थल मंदिर (बागुण्ड का मंदिर) से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने श्रद्धालुओं को सोच में डाल दिया है। मंदिर की भव्यता और स्थापत्य कला को चार चांद लगाने वाले मंदिर के शिखर (गुंबद) पर वर्तमान में ‘धर्म ध्वजा’ अनुपस्थित है।
आस्था का प्रतीक है ध्वजा
हिंदू मंदिर शास्त्र और परंपराओं के अनुसार, मंदिर के शिखर पर फहराती ध्वजा केवल कपड़े का एक टुकड़ा नहीं, बल्कि भगवान की उपस्थिति और विजय का प्रतीक मानी जाती है। दूर से मंदिर के दर्शन करने वाले भक्तों के लिए ध्वजा को देखना ही साक्षात भगवान के दर्शन के समान माना जाता है। सांवरिया सेठ के प्राकट्य स्थल पर, जहाँ से भगवान की प्रतिमा प्राप्त हुई थी, वहाँ शिखर का सूना होना भक्तों की आंखों को खटक रहा है।
भक्तों की उठती मांग
मंदिर आने वाले दर्शनार्थियों का कहना है कि मंदिर का जीर्णोद्धार और सौंदर्य तो सराहनीय है, लेकिन बिना ध्वजा के शिखर अधूरा प्रतीत होता है।
“सांवरिया सेठ के दरबार में हम दूर से शिखर की ध्वजा देखकर नमन करते हैं। ध्वजा का न होना मंदिर की शोभा और परंपरा दोनों के लिहाज से चिंता का विषय है।” – एक स्थानीय श्रद्धालु
मुख्य विचार जो ध्यान आकर्षित करते हैं:
अधूरा सौंदर्य: मंदिर की गुलाबी पत्थर की नक्काशी और गुंबद बेहद सुंदर हैं, लेकिन ध्वजा स्तंभ (लाठी) का खाली होना इस दृश्य को फीका कर रहा है।
धार्मिक परंपरा: शास्त्र कहते हैं कि शिखर पर ध्वजा होने से मंदिर की सकारात्मक ऊर्जा का प्रसार होता है।
प्रशासन से अपेक्षा: भक्तों ने मंदिर ट्रस्ट और प्रशासन से आग्रह किया है कि इस ओर तुरंत ध्यान दिया जाए और जल्द से जल्द विधि-विधान के साथ शिखर पर ध्वजा स्थापित की जाए।
विशेष समाचार
सांवरिया सेठ का यह प्राकट्य स्थल करोड़ों लोगों की अटूट आस्था का केंद्र है। ऐसे में मंदिर के शिखर पर भव्य ध्वजा का लहराना न केवल इसकी सुंदरता को बढ़ाएगा, बल्कि भक्तों की धार्मिक भावनाओं को भी संतुष्टि प्रदान करेगा। अब देखना यह है कि मंदिर प्रशासन इस ओर कितनी जल्दी कदम उठाता है।




