मनरेगा मजदूरों की मजदूरी का भुगतान, ग्राम रोजगार सेवकों के मानदेय और ई पी एफ जैसी शिकायतों को लेकर कांग्रेस ने प्रदेश सरकार और स्थानीय प्रशासन पर उठाए सवाल

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उन्नाव।जनपद में मनरेगा योजना के तहत मजदूरों की मजदूरी, सामग्री मद के भुगतान, ग्राम रोजगार सेवकों के मानदेय और ईपीएफ जमा न होने की शिकायतों को लेकर कांग्रेस ने प्रदेश सरकार और स्थानीय प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। पार्टी ने इन मुद्दों को लेकर मंगलवार 17 मार्च को विकास भवन का घेराव कर धरना प्रदर्शन करने की घोषणा की है।
मनरेगा कोऑर्डिनेटर विदुषी बाजपेई ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी देशभर में मनरेगा बचाओ संग्राम चला रही है। एआईसीसी महासचिव व उत्तर प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडेय तथा प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि यदि जॉब कार्ड धारकों और मजदूरों का बकाया भुगतान नहीं किया गया तो कांग्रेस सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेगी। इसी क्रम में प्रदेश के सभी 75 जिलों में जिला व शहर कांग्रेस कमेटियां संयुक्त रूप से 17 मार्च को विकास भवन का घेराव कर धरना देंगी। उन्होंने कहा कि उन्नाव जनपद में करीब दो लाख मजदूर परिवारों को पिछले लगभग 75 दिनों से मजदूरी का भुगतान नहीं मिला है, जबकि नियमानुसार 15 दिन के भीतर भुगतान होना चाहिए। प्रशासन की लापरवाही के चलते करीब 2.07 करोड़ रुपये मजदूरी बकाया है, जिसमें फतेहपुर चौरासी ब्लॉक में लगभग 42 लाख और बांगरमऊ ब्लॉक में 35 लाख रुपये से अधिक भुगतान लंबित है। विदुषी बाजपेई ने बताया कि सामग्री आपूर्तिकर्ताओं का भुगतान भी महीनों से रुका हुआ है। जनपद में करीब 35.43 करोड़ रुपये सामग्री मद का भुगतान अटका है, जिसमें बांगरमऊ ब्लॉक में 5.71 करोड़, औरास ब्लॉक में 4.44 करोड़ तथा हसनगंज ब्लॉक में 3.94 करोड़ रुपये शामिल हैं। इससे स्थानीय विक्रेताओं को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि ग्राम रोजगार सेवक पिछले करीब छह महीनों से मानदेय से वंचित हैं। होली जैसे बड़े त्योहार के समय भी उन्हें भुगतान न मिलना गंभीर चिंता का विषय है। इसके अलावा कर्मचारियों के ईपीएफ अंश की कटौती के बावजूद राशि उनके यूएएन खातों में जमा नहीं हो रही है, जिससे वे सामाजिक सुरक्षा के लाभ से वंचित हो रहे हैं। कांग्रेस ने मामले की उच्च स्तरीय जांच कराकर मजदूरों की लंबित मजदूरी, सामग्री मद का भुगतान और ग्राम रोजगार सेवकों का बकाया तुरंत जारी करने की मांग की है। साथ ही ईपीएफ कटौती में अनियमितता की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग उठाई है।


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