बांगरमऊ,उन्नाव।वासंतिक नवरात्रि एवं
श्री शुभ संवत 2083 का शुभारम्भ दिनांक 19 मार्च दिन गुरुवार को हो रहा है । क्योंकि चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा क्षयवती होने से विगत अमावस्या को सुबह 6 बजकर 40 मिनट में समाप्त हो जाती हैं । क्षयवती प्रतिपदा तिथि संवत्सर का प्रारंभ हो रहा है । इसलिए सर्व शास्त्र सम्मत माना जाएगा । यह जानकारी देते हुए आचार्य पण्डित ऋषि कांत शास्त्री ने बताया कि इस संवत्सर के राजा गुरु और मंत्री मंगल है, ब्रह्मा जी ने सृष्टि का आरंभ चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा को किया था और इसी दिन से सतयुग का आरंभ हुआ था। यह सर्वविदित है सूर्योदय के साथ रौद्र नामक संवत का स्वागत पूजन पंचांग श्रवण तथा अपने अपने घरों देवालयों को तोरण ध्वजा पताका से सुसज्जित कर बासंतिक नवरात्र कलश स्थापित कर माता भगवती के नौ रूपों की स्थापना कर विधि विधान से पूजा, आराधना एवं श्री दुर्गा सप्तशती पाठ सनातनियों को करना चाहिए अथवा सुयोग्य आचार्य के द्वारा कराना चाहिए। जिससे वर्ष पर्यन्त सब प्रकार से शुभ फलों की प्राप्ति होती रहे । भगवती के नौ रूपों में 26 मार्च गुरुवार को महागौरी महाष्टमी व्रत किया जायेगा सभी सनातनी धर्मावलंबी भक्तों के यहां नवमी पूजा भी 26 मार्च गुरुवार को दोपहर 12 बजकर 2 मिनट के बाद करें तथा पूर्ण नवरात्र व्रत की पारणा भी इसी दिन कर ली जाएगी। रामावतार की राम नवमी पूजा देश भर में 27 मार्च शुक्रवार को विशेष रूप से रामलल़ा की जन्मस्थली अयोध्या में बहुत ही धूमधाम से शास्त्रीय एवं पारम्परिक रूपानुसार मनाई जाएगी।आज ही के दिन परम पूज्य गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा श्री राम चरित मानस की रचना प्रारंभ की थी।




