सरसौल,कानपुर।इस वर्ष होली के पर्व की तारीखों को लेकर बनी असमंजस की स्थिति अब स्पष्ट हो गई है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, रंगों की होली 4 मार्च को मनाई जाएगी, जबकि होलिका दहन 2 मार्च की देर रात होगा। विद्वान ज्योतिषाचार्यों के मत से, 2 मार्च की रात्रि में भद्रा का प्रभाव रहेगा। हालांकि, मध्यरात्रि के बाद भद्रा के पृष्ठकाल में होलिका दहन करना शास्त्रसम्मत माना गया है। होलिका दहन के लिए उपयुक्त समय रात 12:51 बजे से लेकर 3 मार्च की सुबह 2:03 बजे तक निर्धारित किया गया है।
इस संबंध में आचार्य पंडित निर्मल शास्त्री ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार, यदि भद्रा पूरी रात रहे और पूर्णिमा मध्यरात्रि के बाद लगे, तो भद्रा के पृष्ठकाल में ही दहन करना उचित होता है। उन्होंने भद्रा पुच्छ के विशेष नियम का भी उल्लेख किया कि यदि भद्रा मध्यरात्रि के बाद तक बनी रहे और अन्य समय उपलब्ध न हो, तो आपात स्थिति में भद्रा के पुच्छ भाग में दहन किया जा सकता है। भद्रा मुख में दहन करना शास्त्रों में निषिद्ध है। 3 मार्च को चंद्रग्रहण पड़ रहा है, जिसके कारण इस दिन रंगोत्सव नहीं मनाया जाएगा। ग्रहण का समय दोपहर समय दोपहर 3:21 बजे से शाम 6:47 बजे तक रहेगा। भारत में यह ग्रहण चंद्रोदय के साथ शाम 6:14 बजे प्रारंभ होकर 6:47 बजे समाप्त होगा।
ग्रहण के कारण 3 मार्च को सुबह 9:19 बजे से सूतक काल लग जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूतक काल में किसी भी प्रकार का शुभ कार्य, उत्सव या पर्व मनाना वर्जित होता है। यही कारण है कि 3 मार्च को रंगों का त्योहार नहीं मनाया जाएगा।
शास्त्रों में यह नियम है कि चैत्र कृष्ण प्रतिपदा तिथि में जिस दिन सूर्योदय हो, उसी दिन वसंतोत्सव या रंगोत्सव मनाया जाना चाहिए। इस वर्ष 4 मार्च को सूर्योदय के समय चैत्र कृष्ण प्रतिपदा तिथि होने के कारण, शास्त्रीय मर्यादा और लोक परंपरा के अनुसार पूरे देश में 4 मार्च को होली मनाई जाएगी।
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