कानपुर।शहर के दक्षिण क्षेत्र स्थित श्री भोलेश्वर श्याम मंदिर किदवई नगर में फाल्गुन एकादशी के पावन अवसर पर ‘रंग-रंगीला फाल्गुन उत्सव’ अत्यंत श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। श्री श्याम प्रभु (खाटू वाले) के भव्य भजन-कीर्तन और अलौकिक श्रृंगार के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का भारी सैलाब उमड़ पड़ा, जिससे पूरा मंदिर प्रांगण ‘हारे के सहारे’ के जयकारों से गुंजायमान हो उठा मंडल अध्यक्ष मनोज अग्रवाल ने अपनी धर्मपत्नी अनीता अग्रवाल के साथ बाबा श्याम की अखंड ज्योति प्रज्वलित कर किया इस विशेष अवसर पर बाबा का दरबार सजाने के लिए कोलकाता से विशेष पुष्प मंगाए गए थे। बाबा का मनोहारी दिव्य श्रृंगार देख भक्त भावविभोर हो उठे सांस्कृतिक संध्या में भजनों की ऐसी अविरल धारा बही कि भक्त खुद को थिरकने से रोक नहीं पाए कोलकाता के गायक अभिषेक शर्मा ने “आओ खाटू वाले का मेला देख लो” और “गलती तेरी है सरकार, फाल्गुन दिखा दियो एक बार” जैसे भजनों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया, स्थानीय गायक जय शंकर शुक्ला ने “आयो फागण मेलो, बाबो मारे हेलो” और “लो फागुन आया रे, मस्तियाँ लाया रे” गाकर पांडाल में मौजूद हजारों महिला-पुरुषों को नृत्य करने पर मजबूर कर दिया कार्यक्रम के दौरान भक्तों ने बाबा के साथ फूलों की होली खेली और इत्र वर्षा की गई, जिससे वातावरण पूरी तरह सुगंधित और दिव्य हो गया पौराणिक महत्व: क्यों कहलाते हैं ‘हारे के सहारे’: उत्सव के दौरान बाबा श्याम की महिमा का गुणगान करते हुए बताया गया कि महाभारत काल में माता अहिलावती के पुत्र बर्बरीक ने भगवान शिव की तपस्या कर तीन अमोघ बाण प्राप्त किए थे युद्ध के समय उन्होंने अपना शीश भगवान श्रीकृष्ण को दान कर दिया था उनकी इस महान आहुति से प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने उन्हें अपना नाम ‘श्याम’ दिया और वरदान दिया कि कलियुग में वे ‘हारे के सहारे’ के रूप में पूजे जाएंगे इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में नरेश अग्रवाल, रामनाथ गुप्ता, अभिषेक मालपानी, महेन्द्र शर्मा, श्याम मिश्रा, दिलीप साहू, विवेक जैन, सतीश अग्रवाल, गोविंदा अग्रवाल, संचित अग्रवाल, नरेश गुप्ता, विनोद कुमार अग्रवाल, अनीस अग्रवाल, अमित गुप्ता, रमन झंवर, सौरभ अग्रवाल, सरवन मिश्रा, अवनीश दीक्षित सहित संस्था के समस्त पदाधिकारियों व सदस्यों का विशेष सहयोग रहा।




