उन्नाव।रसोई बजट पर महंगाई की मार के बीच अब गैस चोरी की घटनाओं ने आम आदमी की चिंता बढ़ा दी है। हालिया शिकायतों और जांच रिपोर्टों से यह खुलासा हुआ है कि गैस एजेंसी के कुछ कर्मचारी और डिलीवरी मैन रास्ते में ही सिलेंडरों से गैस चोरी कर रहे हैं।
जांच में सामने आया है कि चोरी करने के लिए अक्सर ‘रिफिलिंग पाइप’ का इस्तेमाल किया जाता है। डिलीवरी वैन के चालक और कर्मचारी सुनसान जगहों पर गाड़ी रोककर भरे हुए सिलेंडर से 1 से 2 किलो गैस निकालकर खाली सिलेंडरों में भर देते हैं। शातिर चोर सिलेंडर की प्लास्टिक सील को इस तरह गरम करके निकालते हैं कि वह टूटती नहीं और गैस निकालने के बाद उसे दोबारा चिपका दिया जाता है। ग्राहकों को शक न हो, इसके लिए अक्सर वजन करने वाली मशीनों में भी गड़बड़ी की जाती है। एक पीड़ित उपभोक्ता ने बताया, “पिछले दो महीनों से मेरा गैस सिलेंडर जो 45 दिन चलता था, अब 30 दिन में ही खत्म हो रहा है। जब मैंने डिलीवरी मैन से वजन करने को कहा, तो उसने टालमटोल कर दी।”एजेंसी मालिकों का कहना है कि वे अपने स्तर पर जांच करते हैं, लेकिन रास्ते में होने वाली गतिविधियों पर नजर रखना मुश्किल होता है। यदि आप भी गैस सिलेंडर ले रहे हैं, तो इन सावधानियों को जरूर बरतें- डिलीवरी लेते समय अपने सामने स्प्रिंग बैलेंस (वजन मशीन) से सिलेंडर का वजन करवाएं। भरे हुए सिलेंडर का कुल वजन सिलेंडर पर लिखा होता है। सुनिश्चित करें कि प्लास्टिक की सील और धागा पूरी तरह सुरक्षित है। यदि सील ढीली या चिपकाई हुई लगे, तो सिलेंडर न लें।सील खोलने के बाद यह देखें कि अंदर का रबर रिंग कटा-फटा न हो। गैस कम निकलने पर तुरंत संबंधित गैस कंपनी के टोल-फ्री नंबर पर शिकायत दर्ज करें। प्रशासन को इस दिशा में अधिक सख्ती बरतने की जरूरत है। औचक निरीक्षण और दोषियों के खिलाफ लाइसेंस रद्द करने जैसी कार्रवाई ही इस “गैस माफिया” पर लगाम लगा सकती है।




