फतेहपुर।चांदपुर थाना क्षेत्र में तैनात अमौली चौकी इंचार्ज ने एक मामले में मलाई खाने के चक्कर से जल्द बाजी में ऐसी रिपोर्ट लगाई की एक मृतक को गवाह दिखाकर फर्जी तरीके से रिपोर्ट लगाकर कोर्ट को ही गुमराह कर दिया। जानकारी के अनुसार बता दे की विवेक सोनकर पुत्र हरीलाल सोनकर उम्र 36 वर्ष ने आरोप लगाए थे की बीते वर्ष पहले 15 अप्रैल 2025 को रात्रि करीबन 9 बजे घर के लिए सब्जी लेकर आ रहा था।तभी अमौली कस्बे में रास्ते में रह रहे पछहियों के टट्टर के पास अर्जुन सोनकर पुत्र प्रकाश चंद्र सोनकर,प्रकाशचंद्र सोनकर पुत्र फूलमन सोनकर, रितिक सोनकर पुत्र मँझिल सोनकर,मिथुन पुत्र सिल्ली इन सभी ने रोककर जेब की तलाशी लेने लगे विरोध करने पर लाठी,डंडा, चापड़ से हमला कर लहूलुहान कर दोनों पैरों को तोड़ अधमरा कर भाग निकले।पीड़ित को घर न पहुंचने पर खोजबीन करते हुए स्वजनों में पिता ने पुत्र विवेक को रास्ते में खून से लतपथ देखा आनन फानन सरकारी अस्पताल ले गए जहां हालत गंभीर देख स्वजनों ने कैलाश मेडिकल सेंटर रामादेवी कानपुर में भर्ती करा कर कई दिनों तक उपचार कराया।उपचार के बाद प्रथम शिकायती पत्र नजदीकी थाने में जाकर पीड़ित के पिता द्वारा दी गई थी।जिसमें विपक्षीय धन बल द्वारा राजनैतिक प्रभाव डालने की वजह से पीड़ित को न्याय नहीं मिला था।तब पीड़ित के पिता हरिलाल सोनकर ने न्यायालय की शरण लेकर मुकदमा दर्ज कराया कोर्ट ने सभी दोषियों के खिलाफ थाने में मुकदमा पंजीकृत करने का आदेश दिया लेकिन पुलिस ने पीड़ित के साथ हुई घटना को बदल कर सीधे पिकअप से एक्सीडेंट दिखाकर घटना स्थल में मौजूद चार गवाहों को बनाकर फर्जी तरीके से रिपोर्ट लगाकर आरोपियों को पुलिस बचा कर फर्जी आख्या लगाकर भेज दिया।महीनों बीत जाने के बाद पीड़ित को जब न्याय न मिलने के आसार दिखाई दिए तो पीड़ित विवेक सोनकर ने फिर से दुबारा कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और दोषियों के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत कराने न्याय की गुहार लगाई कोर्ट से घटना को दुबारा संज्ञान में लेकर जांच के आदेश दिए जांच अमौली चौकी इंचार्ज को दी गई पुलिस ने फिर से वही खेल कर पहली आख्या के अनुसार सभी चार ओमप्रकाश पुत्र गयाराम प्रजापति,संतोष कुमार पुत्र सुंदरलाल,संजीव कुमार पुत्र प्रेम शंकर,आसमा पत्नी तुफैल अहमद गवाहों को दिखाकर गवाह नोट कर आख्या भेज दी। दुबारा आख्या लगने के बाद अब हैरान कर देने वाली बात यहां तब आई जब पुलिस पहली आख्या में जिन गवाहों को दिखाकर रिपोर्ट में आख्या लगाई उसमें एक गवाह आसमा पत्नी तुफैल अहमद निवासी अमौली की 9 सितंबर 2025 को मौत हो चुकी थी।अब सवाल यह उठ रहे हैं की जब पुलिस ने 26 जनवरी 2026 को रिपोर्ट लगाकर आख्या लगाई तो उसमें यह तक नहीं देखा गया की जो गवाह हैं वो जिंदा भी है या मर चुके है।पुलिस ने कोर्ट को गुमराह कर फर्जी तरीके से रिपोर्ट लगाकर मलाई खाने के चक्कर में इतना गिर सकती है किसी ने सोचा भी नहीं होगा।पुलिस केवल इन अपराधियों को बचाने के चक्कर में मनमर्जी रिपोर्ट लगाकर कोर्ट को गुमराह तो किया ही इसके अलावा इनके कार्य शैली पर बड़े सवालिया सवाल भी खड़े हो गए की एक मुर्दे को गवाह में शामिल कर पुलिस ने आख्या लगा दी।अब पीड़ित न्याय के लिए अफसरों से लेकर कोर्ट के चक्कर काट रहा है।पीड़ित का आरोप है की सभी आरोपियों को पुलिस बचा रही हैं।
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