कानपुर। निवासी खेल और मीडिया से आने वाले डॉ. रोहित सक्सेना अब राजनीती के खेल मे माहिर होते दिख रहे हैं,जहाँ एक ओर नगर मे जनता मे लोकप्रियता दिन बा दिन बढ़ती जा रही दूसरी ओर दिल्ली मे अपनी पकड मजबूत करते नजर आ रहे हैं.. हाल ही मे उनकी कई मीटिंग राष्ट्रीय संगठन मंत्री बी एल संतोष से, बीजेपी मे अपनी पकड रखने वाले संजय मयूक और अब नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन से देर तक हुई मुलाकात कई तरफ इशारा करती हैं,जो भी हो मीडिया से आये एक नाम ने अपने दम पर शहर की सांसदी पायी और अब मीडिया मे दो दशको से ज़्यादा समय देने वाले डॉ. रोहित सक्सेना भी राष्ट्रीय स्तर पर जो कर रहे उससे एक बात तो साबित होती हैं,बीजेपी ने राजनितिक परिवेश के बाहर से आने वाले पढ़े लिखे युवाओ को तरजीह देना शुरू कर दिया हैं, इस पहल से माना जा रहा हैं कि पढ़े लिखे युवाओ का राजनीती मे प्रवेश बड़ा बदलाव लायेगा। जहाँ अन्य पार्टिया जाति और धर्म को आकर्षित करने मे लगी हुई हैं वही एक नई सोच और पहल के तहत बीजेपी पढ़े लिखे बिना राजनितिक बैक ग्राउंड के युवाओ को जोडती जा रही हैं.. हो सकता हैं आने वाले समय मे ये युवा राजनीती की परिभाषा बदलने की ओर काम करें,उसी फेरिस्त मे एक नाम कानपुर से बढ़ रहा डॉ. रोहित सक्सेना के रुप मे,ज़िन्होने राजनीती मे आने के बाद सबसे ज़्यादा महत्व शिक्षा की ओर प्रेरित करने के साथ लोगो के इलाज और समस्याओं को बिना जाति धर्म देखे समाधान करना शुरू किया अब राजनीती मे भी आपके काम का अंकलन होगा ये बात तो तय हो चुकी हैं।




