फतेहपुर, । देश की पहली मुस्लिम महिला शिक्षिका ज्ञानज्योति फातिमा शेख की जयंती का कार्यक्रम कलेक्ट्रेट परिसर स्थित बुद्ध पार्क के निकट मनाया गया। बार एशोसियेशन के अध्यक्ष गया प्रकाश दुबे, बाल कल्याण समिति की सदस्य तरन्नुम व महिला थाने से सब इंस्पेक्टर आशा पांडेण्य, सामाजिक कार्यकर्ता मालती देवी, वरिष्ठ अधिवक्ता रूही एडवोकेट ने सामूहिक रूप से केक काटा। सदस्य तरन्नुम ने कहा कि फातिमा शेख ने महिलाओं के लिए जो स्कूल खोला वो महिलाओं के लिए मील का पत्थर साबित हुआ। उन्होंने सामाजिक कुरीतियों को दूर करने में भी अतुलनीय योगदान दिया।
बुद्धा पार्क के निकट पहली मुस्लिम महिला शिक्षिका का जन्मदिन मनाते अधिवक्ता व अन्य।
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ने कहा कि फातिमा शेख ने महिलाओं के बीच शिक्षा की जो ज्योति जलाई वो आज निरन्तर जल रही है। शिक्षा की वजह से आज महिलाएं हर क्षेत्र में अपना व देश का नाम रोशन कर रही हैं। आयोजक मोहम्मद आसिफ एडवोकेट ने बताया कि 1848 में लड़कियों, विशेष रूप से दलित और मुस्लिम समुदाय की लड़कियों को शिक्षित करने में उनका योगदान अविस्मरणीय है। फातिमा शेख ने सावित्रीबाई फुले और महात्मा ज्योतिबा फुले के साथ दलित महिलाओं के उत्थान के लिए अथक प्रयास किए। सावित्रीबाई फुले के शिक्षा के कार्य को आगे बढ़ाने के लिए जब उन्हें घर से निकाला गया। तब फातिमा शेख के भाई उस्मान शेख ने फुले दंपति को सहारा दिया। स्कूल में अध्यापकों की अनुपलब्धता के समय फातिमा शेख ने लड़कियों को पढ़ाने का महत्वपूर्ण कार्य किया। फातिमा शेख को दलित-मुस्लिम एकता के एक प्रमुख ध्वजवाहक के रूप में स्मरण किया जाता है। इस मौके पर बार एशोसिएशन के महामंत्री जितेन्द्र सिंह, वीर प्रकाश लोधी एडवोकेट, श्रवण कुमार गौड़ एडवोकेट, वीर सिंह एडवोकेट, अनुज दिक्षित एडवोकेट, अजलाल फारुकी एडवोकेट, पूर्व पुलिस उपाधीक्षक मोहम्मद कासिम, पूर्व महामंत्री बार एशोसिएशन बचानी लाल, पूर्व महामंत्री आशीष गौण, चंद्र पाल मौर्य एडवोकेट, ममनून एडवोकेट, अत्तहियात एडवोकेट, शकील एडवोकेट, सुरेन्द्र गौतम एडवोकेट, बौद्ध प्रिय गौतम एडवोकेट, मोहम्मद गुलफाम खान एडवोकेट, रुखसार एडवोकेट, अलफिशा एडवोकेट, दिव्या एडवोकेट, दानिशी एडवोकेट, यासीन एडवोकेट, मोहम्मद यासीन एडवोकेट, मिर्जा असद बेग एडवोकेट, शिव प्रसाद, बृजेश सोनी, गाज़ी अब्दुर रहमान गनी, दिलशाद अहमद, धीरज कुमार बाल्मीकि, शुऐब अहमद अरबी, इरशाद हुसैन, प्रकाश अंबेडकर, नरेश पासी मौजूद रहे।




