बड़ी अकीदत और एहतराम के साथ मनाया गया हजरत मखदूम शाह खादिम सफ़ी रह० अलै० का उर्स मुबारक

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उन्नाव।सूफी-संतों की सरजमीं सफीपुर में हजरत मखदूम शाह खादिम सफ़ी रहमतुल्लाह अलैह का उर्स मुबारक बड़ी अकीदत, एहतराम और धूमधाम के साथ संपन्न हुआ। इस खास मौके पर दरगाह शरीफ को बेहद खूबसूरती से सजाया गया था और पूरे कस्बे में रूहानी रौनक देखते ही बन रही थी।
​उर्स का आगाज परंपरागत तरीके से कुरान ख्वानी के साथ हुआ। दरगाह के सज्जादानशीन और खादिमों की मौजूदगी में मजार शरीफ पर गुस्ल की रस्म अदा की गई। इसके बाद क्षेत्रीय और दूर- दूराज से आए जायरीनों ने बड़ी अकीदत के साथ चादर पेश की और बारगाह-ए-मखदूम में हाजिरी दी।
​रविवार को दिन में महफिल-ए-समां (कव्वाली) का शानदार आयोजन किया गया, जिसमें मशहूर कव्वालों ने सूफियाना कलाम पेश कर समां बांध दिया। “भर दो झोली मेरी या मुहम्मद” और मखदूम पाक की शान में पढ़ी गई मनकबत सुनकर जायरीन झूम उठे। शाम को बाद नमाज असर कुल शरीफ की रस्म अदा की गई जिसमें खास फातिहा में मुल्क में अमन चैन, खुशहाली, तरक्की और भाईचारे की दुआएं मांगी गईं। उर्स के दौरान लोगों ने अपनी मन्नतें भी मांगीं। ​उर्स के दौरान न केवल सफीपुर और उन्नाव, बल्कि आसपास के तमाम जिलों के अलावा पूरे देश से बड़ी संख्या में जायरीन पहुंचे। जायरीनों के लिए जगह-जगह लंगर (तबर्रुक) का इंतजाम किया गया था। मेले जैसा माहौल होने के कारण बच्चों और महिलाओं ने भी जमकर खरीदारी की।​ गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल ​सफीपुर का यह उर्स हमेशा से ही हिंदू-मुस्लिम एकता और गंगा-जमुनी तहजीब का प्रतीक रहा है। इस बार भी हर मजहब के लोगों ने उर्स की व्यवस्थाओं में सहयोग किया और बड़ी तादाद में शिरकत की, जो यह संदेश देता है कि संतों की दरगाहें मोहब्बत और भाईचारे का केंद्र हैं। उर्स के मौके पर हजरत मखदूम शाह सफी खानकाहे सफविया के सज्जादा नशीं हजरत नवाजिश मोहम्मद फारूकी सफवी (समदी मियां), अफजाल मोहम्मद फारूकी सफ़वी, हजरत मखदूम खादिम शाह सफ़वी खानकाह के सज्जादा नशी सैयद लायक मियां, शाहिद मियां, वकील अहमद खलीली उर्फ पुत्तन मियां, बांगरमऊ के पूर्व अध्यक्ष इजहार खां गुड्डू, समाजसेवी फजलुर्रहमान, मो० अकरम, सहित काफ़ी तादाद में लोग मौजूद रहे।।


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