लोकलाज ने कुचली ममता: नाबालिग किशोरी ने दिया नवजात को जन्म, परिजनों ने डस्टबिन में फेंका मासूम

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उन्नाव।जिले में मानवता को शर्मसार कर देने वाली एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहां समाज की लोकलाज और डर ने ममता पर भारी पड़ते हुए एक नवजात की जान को खतरे में डाल दिया। एक निजी नर्सिंगहोम में नाबालिग किशोरी के प्रसव के बाद परिजनों ने नवजात शिशु को अस्पताल के डस्टबिन में फेंक दिया। समय रहते चाइल्ड लाइन और जिला प्रशासन की सतर्कता से मासूम की जान बचाई जा सकी।

यह सनसनीखेज मामला शहर के कब्बाखेड़ा स्थित एक निजी अस्पताल का है। जानकारी के अनुसार, 16 वर्षीय नाबालिग किशोरी को गर्भपात के उद्देश्य से अस्पताल लाया गया था। गर्भ की अवधि अधिक होने के कारण गर्भपात संभव नहीं हो सका और किशोरी ने पूर्ण अवधि का शिशु जन्म दिया।
लोकलाज के डर ने कराई हैवानियत
बताया जा रहा है कि सामाजिक बदनामी और लोकलाज के भय में परिजनों ने नवजात शिशु को अस्पताल परिसर में रखे डस्टबिन में डाल दिया। इसी दौरान गर्भपात की सूचना मिलने पर जिला प्रोबेशन अधिकारी के निर्देश पर चाइल्ड लाइन टीम अस्पताल पहुंची।
जांच के दौरान जब टीम ने डस्टबिन की तलाशी ली, तो अंदर नवजात शिशु जिंदा मिला, जिसे देखकर हर कोई सन्न रह गया। बिना देर किए शिशु को बाहर निकालकर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों के अनुसार उसकी हालत फिलहाल स्थिर है।
चाइल्ड लाइन की तत्परता से टली बड़ी अनहोनी
जिला प्रोबेशन अधिकारी क्षमानाथ राय ने बताया कि नवजात को लगभग दो माह तक चिकित्सकीय निगरानी में रखा जाएगा। पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद उसे लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी। वहीं किशोरी को भी जिला अस्पताल में भर्ती कर उपचार कराया जा रहा है।
दुष्कर्म का आरोप, जांच में जुटी पुलिस
मामले ने उस समय और गंभीर रूप ले लिया जब किशोरी की मां ने पड़ोस के युवक के खिलाफ दुष्कर्म की तहरीर दी। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है और पूरे प्रकरण की गहन जांच शुरू कर दी गई है।
यह घटना सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि समाज की उस सोच पर करारा तमाचा है, जहां लोकलाज के नाम पर एक नवजात की जिंदगी को डस्टबिन में डाल दिया जाता है। यह मामला कानून, प्रशासन और समाज—तीनों के लिए आत्ममंथन की जरूरत को उजागर करता है।
प्रशासनिक कार्रवाई जारी है और पूरे जिले की निगाहें इस संवेदनशील मामले पर टिकी हुई हैं।


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