बड़ी अकीदत के साथ मनाया जाएगा हजरत मोहम्मद खादिम शफी मोहम्मदी र०अ० का 160 वां सालाना उर्स मुबारक

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उन्नाव।सफीपुर की सरजमीं पर मशहूर सूफी संत हजरत मोहम्मद खादिम सफी मोहम्मदी रहमतुल्लाह अलैह का सालाना उर्स और कुल शरीफ बड़ी अकीदत और एहतराम के साथ मनाया जाएगा। इस मुबारक मौके पर देश के कोने-कोने से जायरीन (तीर्थयात्री) अपनी मुरादें और अकीदत के फूल लेकर दरगाह शरीफ पर हाजिर होते हैं।
​ ​ दरगाह के मुतवल्ली व खादिम हजरत मोहम्मद लायक नाजिम खादमी सफ़वी ने बताया कि आगामी 3, 4, 5, 6, जनवरी 2026 को आस्ताना-ए-आलिया खादमियाँ (बड़ी दरगाह) सफीपुर- उन्नाव में उर्स मुबारक मनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि 3 जनवरी 2026 सनीचर को ग़ुस्ल मजार मुबारक 10 बजे दिन में होगा। 4 जनवरी 2026 इतवार को बाद नमाज फजिर कुरआन ख्वानी होगी। दिन में 11बजे से महफिले समा (कव्वाली) का प्रोग्राम होगा। बाद नमाज असर हज़रत मखदूम शाह खादिम सफी र० अलै० का कुल शरीफ (फ़ातिहा खास) होगी। कुल शरीफ का मंजर बेहद रूहानी होता है, उर्स के आगाज में आस्ताने को गुस्ल दिया जाता है और संदल पेश किया जाता है। यहां आम और खास सभी अकीदतमंद भी कतारों में लगकर अपनी हाजिरी दर्ज कराते हैं। रूहानी कलाम और सूफियाना कव्वालियों के जरिए खुदा और उसके वलियों की शान में नज़राने पेश किए जाते है। यह कार्यक्रम का सबसे अहम पड़ाव है। हजरत खादिम सफी साहब के बताए रास्ते पर चलने का संकल्प लिया जाता है और मुल्क में अमन-चैन के लिए दुआ की जाती है। ​हजरत मोहम्मद खादिम सफी मोहम्मदी रहमतुल्लाह अलैह ने अपनी पूरी जिंदगी इंसानियत की खिदमत और खुदा की इबादत में गुजारी। सफीपुर की यह दरगाह सदियों से ‘गंगा-जमुनी तहजीब’ का केंद्र रही है, जहाँ हिंदू-मुस्लिम दोनों ही मजहबों के लोग बराबर की अकीदत रखते हैं। दरगाह कमेटी की ओर से आने वाले तमाम मेहमानों के लिए लंगर का इंतजाम किया जाता है।


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