ज्वार बाजरा का पता नहीं क्रय केंद्रों पर की जा रही जमकर खरीद

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उन्नाव।जिम्मेदार अधिकारी दें ध्यान तो खुलेगा बड़ा राज।
केंद्र और राज्य सरकारें किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए MSP पर मोटे अनाज खरीद रही हैं जिससे किसानों को उनका सही दाम मिल सके इसके साथ साथ ‘पोषक-अनाज’ के रूप में बढ़ावा मिले।
लेकिन उन्नाव जनपद के बांगरमऊ तहसील क्षेत्र में बगैर पैदावार के ही धड़ले के साथ हो रही मोटे अनाज की खरीदारी खरीद एजेंसियों के लिए बेहतर अवसर प्रदान करती दिखाई पड़ रही हैं।
साथ ही इस अनैतिक कार्य में क्षेत्रीय जिम्मेदारों का कोई इस ओर ध्यान न देना सवालिया निशान खड़ा कर रही है। वहीं जांच एजेंसियों द्वारा कमीशन के खेल में कागजी कोरम पूर्ण कर सरकार को जबरदस्त चूना लगाया जा रहा है।यदि ज्वार बाजरा खरीदारी की जमीनी जांच की जाए तो चौंकाने वाले खुलासे होंगे इसके साथ ही कई अधिकारियों पर कार्रवाई की तलवार भी लटक सकती है। लेकिन सिस्टम के लचर रवैया के कारण कोई भी अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है।
आपको बता दें की किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा ज्वार का मूल्य MSP मूल्य लगभग 3700 के करीब रखा है। सरकार की मंशा है कि किसानों को उनकी फसल का उचित दाम मिल सके जिसके लिए तहसील क्षेत्र में खरीद केंद्र खोले गए हैं जहां पर किसान अपनी ज्वार बाजरा की फसल को सही दामों पर बेच सकें।जिसकी उपज बिक्री के बाद किसानों के खाते में उनकी रकम पहुंचे।जिसका कागजी कोरम पूर्ण कर धड़ल्ले से खरीद हो रही है।
अब सवाल उठता है कि बांगरमऊ तहसील क्षेत्र में ज्वार तथा बाजरे की फसल ना के बराबर होती है तो फिर इतना सारा ज्वार तथा बाजरे की खरीदारी कैसे और कहां से हो रही है?
वहीं सूत्रों की मानें तो अन्य जनपदों सहित गैर प्रति में ज्वार एवं बाजरे की अधिक पैदावार होने तथा वहां पर मूल्य कम होने से बेहद कम दामों पर आसानी से ज्वार बाजरा मिल जाता है।जिसकी वहां से खरीददारी कर यहा लाकर कुछ खास विश्वास पात्र खेतिहर लोगों को कुछ पैसों का लालच देकर सिस्टम से उन्हीं किसानों के नाम पर ज्वार बाजरा की बिक्री की जाती है।इस प्रकार रुपया भी उन्हीं के बैक खातों में जाता है जिनसे बाद उन लोगों से पैसे निकलवा लिए जाते हैं।और इस प्रकार सिस्टम से बम्पर ज्वार बाजरा की खरीददारी कर सरकार के लक्ष्य को पूरा किया जा रहा है।
वहीं तहसील स्तर के जिम्मेदार अधिकारी भी कभी कभार जांच के दौरान कागजी कार्रवाई की जांच पड़ताल कर संतोष जताते हुए स्वीकृत प्रदान कर देते हैं। जिससे सरकारी धन का दुरुपयोग होने की लगातार चर्चा बनी रहती है।
यही हाल धान क्रय केन्द्रों का है।सरकार नें धान का समर्थित मूल्य 2369 रुपए प्रति कुंतल निर्धारित कर रखा है लेकिन यहां पर भी गिने चुने किसानों का ही धान क्रय किया जा रहा है वही व्यापारी लोग क्रय केंद्रों पर हावी हैं।


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