उन्नाव।उम्रकैद की सजा काट रहे पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाई कोर्ट ने सेंगर की उम्रकैद की सजा को फिलहाल सस्पेंड करते हुए उसे जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। यह राहत सेंगर की ओर से दायर उस अपील पर मिली है, जिसमें उसने निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी थी। अदालत ने साफ किया है कि यह आदेश अपील के अंतिम निपटारे तक प्रभावी रहेगा। हाई कोर्ट ने सेंगर को 15 लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की तीन जमानतों पर रिहा करने का निर्देश दिया है। हालांकि कोर्ट ने जमानत के साथ कई सख्त शर्तें भी लगाई हैं, ताकि पीड़िता और उसके परिवार की सुरक्षा से कोई समझौता न हो।
इन शर्तों के साथ कोर्ट ने दी सेंगर को जमानत
कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया है कि कुलदीप सिंह सेंगर पीड़िता के पांच किलोमीटर के दायरे में किसी भी हालत में प्रवेश नहीं होना चाहिए। इसके अलावा, वह पीड़िता या उसके परिवार के किसी भी सदस्य से सीधे या परोक्ष रूप से संपर्क नहीं करे। कोर्ट ने यह भी चेतावनी दी है कि किसी तरह की धमकी, दबाव या डराने की कोशिश को जमानत की शर्तों का उल्लंघन माना जाएगा। सेंगर को अपना पासपोर्ट अदालत में जमा करना होगा। साथ ही, हर सोमवार संबंधित थाने में हाजिरी लगानी होगी, ताकि उसकी गतिविधियों पर नजर रखी जा सके। अदालत ने यह भी कहा है कि यदि शर्तों का उल्लंघन हुआ, तो जमानत तत्काल रद्द की जा सकती है।
अपील लंबित, अंतिम फैसला अभी बाकी
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी साफ किया है कि यह राहत स्थायी नहीं है। सेंगर की अपील पर अभी सुनवाई चलनी है और अंतिम फैसला उसी के बाद आएगा। फिलहाल, सजा पर रोक का मतलब यह नहीं है कि दोषसिद्धि खत्म हो गई है, बल्कि यह केवल अंतरिम राहत है।
क्या है पूरा उन्नाव रेप कांड
उन्नाव रेप कांड साल 2017 में सामने आया था। उस समय उन्नाव जिले की एक नाबालिग लड़की ने तत्कालीन भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर बलात्कार का गंभीर आरोप लगाया था। शुरुआत में पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई को लेकर सवाल उठे और पीड़िता को न्याय के लिए लंबा संघर्ष करना पड़ा। मामला तब देशभर में चर्चा में आ गया, जब पीड़िता ने न्याय न मिलने से परेशान होकर लखनऊ में मुख्यमंत्री आवास के बाहर आत्मदाह की कोशिश की। इस घटना ने पूरे प्रशासनिक तंत्र को कटघरे में खड़ा कर दिया। इसके बाद घटनाक्रम और भी गंभीर होता चला गया। पीड़िता के पिता की पुलिस कस्टडी में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। कुछ समय बाद पीड़िता की कार का भी भीषण सड़क हादसा हुआ, जिसमें उसके दो रिश्तेदारों की मौत हो गई। इन घटनाओं ने पूरे देश में गुस्सा और आक्रोश पैदा कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर दिल्ली पहुंचा मामला
मामले की गंभीरता और निष्पक्ष सुनवाई को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उन्नाव रेप कांड को उत्तर प्रदेश से बाहर ट्रांसफर कर दिल्ली भेजने का आदेश दिया। इसके बाद दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में मामले की सुनवाई हुई। साल 2019 में ट्रायल पूरा होने के बाद अदालत ने कुलदीप सिंह सेंगर को बलात्कार का दोषी ठहराया और उसे उम्रकैद की सजा सुनाई। इसके साथ ही 25 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था।
हाई कोर्ट में दी थी चुनौती
तीस हजारी कोर्ट के फैसले के खिलाफ कुलदीप सिंह सेंगर ने दिल्ली हाई कोर्ट में अपील दायर की थी। इसी अपील पर सुनवाई करते हुए अब हाई कोर्ट ने उसकी सजा पर रोक लगाते हुए जमानत मंजूर की है। इस फैसले के बाद एक बार फिर उन्नाव रेप कांड चर्चा में आ गया है। जहां एक ओर इसे कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर पीड़िता और उसके परिवार की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। अदालत ने अपने आदेश में साफ किया है कि पीड़िता की सुरक्षा सर्वोपरि है और किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अगली सुनवाई 15 जनवरी 2026 को
इस केस की अगली सुनवाई 15 जनवरी 2026 को होगी। उस दिन आपराधिक अपील और आवेदन को चीफ जस्टिस के आदेशों के अधीन रोस्टर बेंच के समक्ष सूचीबद्ध किया जाएगा। इस साल की शुरुआत में अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान में मोतियाबिंद की सर्जरी कराने के लिए उन्हें अंतरिम जमानत दी गई थी। पिछले साल दिसंबर में भी उन्हें इसी तरह की राहत दी गई थी।




