वरिष्ठ अधिवक्ता ने दी मौलिक और कानूनी अधिकारों की जानकारी

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उन्नाव।नगर में एक वैवाहिक कार्यक्रम में शामिल होने आए उच्च न्यायालय खंडपीठ लखनऊ के वरिष्ठ यश भारती अधिवक्ता व प्रमुख समाजसेवी फारूक अहमद ने नगर के समाजसेवी फजलुर्रहमान के आवास पर नागरिकों को उनके मौलिक और कानूनी अधिकारों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आम जनता को कानून की बुनियादी समझ प्रदान करना और उन्हें शोषण से बचाना था।
​मौलिक अधिकार संविधान की शक्ति पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को छह मौलिक अधिकार प्रदान करता है, जो उनके सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक हैं।-
समानता का अधिकार- कानून की नजर में सभी समान हैं, चाहे उनका धर्म, जाति या लिंग कुछ भी हो।
स्वतंत्रता का अधिकार- बोलने, अभिव्यक्ति करने और देश में कहीं भी आने-जाने की आजादी। शोषण के विरुद्ध अधिकार- मानव तस्करी और बाल श्रम जैसी प्रथाओं के खिलाफ सुरक्षा। ​धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार- अपनी पसंद के किसी भी धर्म को मानने और उसका प्रचार करने की स्वतंत्रता। सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकार- अल्पसंख्यकों को अपनी संस्कृति और शिक्षा के संरक्षण का अधिकार।
संवैधानिक उपचारों का अधिकार- यदि किसी के अधिकारों का हनन होता है, तो वह सीधे सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट जा सकता है। ​कानूनी अधिकार और पुलिसिया कार्यवाही- ​शिविर के दौरान वकील ने पुलिस द्वारा गिरफ्तारी और हिरासत से जुड़े महत्वपूर्ण कानूनी अधिकारों पर भी प्रकाश डाला। ​गिरफ्तारी का आधार- पुलिस को किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार करते समय गिरफ्तारी का कारण बताना अनिवार्य है। गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना पुलिस की कानूनी जिम्मेदारी है। ​नि:शुल्क कानूनी सहायता: यदि कोई व्यक्ति वकील करने में सक्षम नहीं है, तो अनुच्छेद 39A के तहत उसे सरकारी खर्च पर वकील (लीगल एड) पाने का हक है। ​महिलाओं के अधिकार: महिलाओं की गिरफ्तारी केवल महिला पुलिसकर्मी की उपस्थिति में और सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच ही की जा सकती है (विशेष परिस्थितियों को छोड़कर) जागरूकता ही बचाव है। ​वकील ने अपने संबोधन के अंत में कहा, “अज्ञानता कानून के उल्लंघन का बहाना नहीं हो सकती। जब नागरिक अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होते हैं, तभी एक न्यायपूर्ण समाज की स्थापना संभव है।” आवास पर मौजूद स्थानीय निवासियों ने इस पहल की सराहना की और अपने संदेहों को दूर करने के लिए अधिवक्ता से प्रश्न भी पूछे। कार्यक्रम का समापन ‘कानून सबके लिए’ के संकल्प के साथ हुआ। इस मौके पर हबीबुलरहमान बाबूजी, संदीप कुमार, नदीम, अजीजुर्रहमान आदिल, अनीसुर्रहमान गोलू, जियाउर्रहमान बब्लू, हफीजुर्रहमान आदि मौजूद रहे।


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