फतेहपुर में मौरंग माफिया पर एसटीएफ का बड़ा वार,खनन अधिकारी, आरटीओ समेत छह पर केस दो गिरफ्तार,वर्षों से चल रहा था ओवरलोड ट्रकों से करोड़ों की अवैध वसूली का खेल

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फतेहपुर। मौरंग के अवैध कारोबार और ओवरलोड ट्रकों से वसूली करने वाले नेटवर्क पर एसटीएफ ने बड़ी कार्रवाई करते हुए जिले में खनन और परिवहन विभाग के अफसरों की मिलीभगत का पर्दाफाश किया है।
एसटीएफ लखनऊ की टीम ने खनन अधिकारी देशराज पटेल परिवहन अधिकारी एआरटीओ पुष्पांजलि मित्र आरटीओ ड्राइवर और दलालों समेत छह लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम सहित कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया है।

*रातों-रात खुला बड़ा नेटवर्क*

एसटीएफ इंस्पेक्टर दीपक सिंह ने बताया कि मंगलवार-बुधवार की दरमियानी रात टीम ने छापेमारी कर मौरंग लदे ट्रकों से “पास” कराने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया।
थरियांव थाने में दर्ज एफआईआर में जिन छह लोगों को नामजद किया गया है, उनमें शामिल हैं –

1. देशराज पटेल, खनन अधिकारी फतेहपुर

2. राजू, गनर (खनन अधिकारी)

3. बबलू पटेल, ड्राइवर (आरटीओ/पीटीओ फतेहपुर)

4. धीरेंद्र सिंह, लोकेशन देने वाला दलाल

5. विक्रम, ट्रक चालक

6. मुकेश तिवारी, ट्रक चालक

*7000 रुपये प्रति ट्रक की वसूली – अफसरों तक पहुंचता था 5000*

एसटीएफ जांच में खुलासा हुआ कि गिरोह मौरंग लदे ओवरलोड ट्रकों को “सुरक्षित पार” कराने के लिए 7000 रुपये प्रति ट्रक वसूलता था।
इसमें से 5000 रुपये विभागीय अधिकारियों को दिए जाते थे, जबकि बाकी रकम दलालों और चालकों में बांटी जाती थी।

एसटीएफ ने मौके से लोकेटर धीरेंद्र सिंह और ट्रक चालक विक्रम को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
उनके कब्जे से एक ओवरलोड ट्रक बरामद हुआ, जिसमें मौरंग लदी थी लेकिन कोई रवन्ना (खनन पास) नहीं था।

पूछताछ में धीरेंद्र ने स्वीकार किया कि यह पूरी वसूली खनन विभाग और आरटीओ कार्यालय के कुछ कर्मचारियों की जानकारी में होती थी।
एसटीएफ को इस बात के पुख्ता साक्ष्य भी मिले हैं।

*अफसरों पर बढ़ी कार्रवाई की तलवार*

एफआईआर दर्ज होने के बाद खनन अधिकारी देशराज पटेल के खिलाफ निलंबन की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
वहीं गनर राजू और ड्राइवर बबलू पटेल की गिरफ्तारी भी कभी भी हो सकती है।
सूत्रों के मुताबिक, जांच टीम अब बैंक खातों और मोबाइल चैट्स से धन के प्रवाह का पता लगा रही है।

*अफसरों की मिलीभगत से फलफूल रहा था नेटवर्क*

एसटीएफ की कार्रवाई से यह साफ हो गया है कि फतेहपुर में मौरंग से जुड़ा अवैध कारोबार वर्षों से “सिस्टम की सुरक्षा” में पनप रहा था।
हर रात जिले की सीमाओं से सैकड़ों ट्रक ओवरलोड होकर निकलते थे, और यह कारोबार लाखों की रोजाना उगाही में तब्दील हो गया था।
स्थानीय सूत्रों का कहना है कि कुछ अधिकारियों और दलालों के गठजोड़ से यह नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय था, जो ट्रकों की जानकारी “लोकेशन पॉइंटर” के जरिए साझा करता था।

*एसटीएफ ने कहा – साक्ष्य ठोस, बड़े नाम भी आ सकते हैं सामने*

एसटीएफ अधिकारियों ने बताया कि जांच में जो साक्ष्य मिले हैं वे बेहद ठोस हैं।
एसटीएफ अब मौरंग कारोबार से जुड़े बड़े ठेकेदारों, परिवहनकर्ताओं और विभागीय कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

*एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा*

फतेहपुर में मौरंग लदे ट्रकों से अवैध वसूली का संगठित नेटवर्क था। इसमें सरकारी कर्मचारियों की संलिप्तता साफ दिख रही है। कई और नाम जल्द सामने आ सकते हैं।

*कार्रवाई से खनन विभाग और परिवहन विभाग में हड़कंप*

एसटीएफ की इस कार्रवाई से दोनों विभागों में खलबली मच गई है।
अधिकारियों के बीच चर्चा है कि यह तो सिर्फ शुरुआत है — आगे कई और खुलासे हो सकते हैं।

जनपद में मौरंग से जुड़ा यह खुलासा न केवल भ्रष्टाचार की गहराई को दिखाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि अवैध कमाई के लिए सरकारी सिस्टम कैसे माफियाओं के आगे नतमस्तक था।


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