सरसौल,कानपुर। विकासखंड स्थित पाल्हेपुर गांव में प्राचीन बूढ़ा माता मंदिर में कार्तिक पूर्णिमा और देव दीपावली के अवसर पर धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया। इस दौरान सुंदरकांड पाठ, हवन, प्रसाद वितरण और एक मेले का आयोजन हुआ।
सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ टूट पड़ी। भक्तों ने बूढ़ा माता के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की। मंदिर प्रांगण ‘जय माता दी’ के जयकारों और भक्ति गीतों से गूंज उठा।
कार्यक्रम में आचार्य पंडित निर्मल शास्त्री के निर्देशन में विधि-विधानपूर्वक पूजा-अर्चना संपन्न हुई। इस अवसर पर कमलेश पाण्डेय, नीरज पाण्डेय, संजय सिंह, जितेंद्र मिश्रा, कुशाग्र पाण्डेय, पीयूष पाण्डेय, विवेक सिंह सहित कई श्रद्धालु उपस्थित रहे।
आयोजन समिति ने उपस्थित भक्तों को प्रसाद वितरित किया और कार्यक्रम की सफलता के लिए सभी का आभार व्यक्त किया।
इस मौके पर आचार्य पंडित निर्मल शास्त्री ने कहा कि देव दीपावली का पर्व केवल दीपदान का नहीं, बल्कि अंतःकरण को प्रकाशित करने का भी प्रतीक है।
भक्तों ने बूढ़ा माता के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की। मंदिर प्रांगण ‘जय माता दी’ के जयकारों और भक्ति गीतों से गूंज उठा।
कार्यक्रम में आचार्य पंडित निर्मल शास्त्री के निर्देशन में विधि-विधानपूर्वक पूजा-अर्चना संपन्न हुई। इस अवसर पर कमलेश पाण्डेय, नीरज पाण्डेय, संजय सिंह, जितेंद्र मिश्रा, कुशाग्र पाण्डेय, पीयूष पाण्डेय, विवेक सिंह सहित कई श्रद्धालु उपस्थित रहे।
आयोजन समिति ने उपस्थित भक्तों को प्रसाद वितरित किया और कार्यक्रम की सफलता के लिए सभी का आभार व्यक्त किया।
इस मौके पर आचार्य पंडित निर्मल शास्त्री ने कहा कि देव दीपावली का पर्व केवल दीपदान का नहीं, बल्कि अंतःकरण को प्रकाशित करने का भी प्रतीक है। उन्होंने जोर दिया कि जब मन में भक्ति और आचरण में शुद्धता होती है, तभी सच्ची दीपावली होती है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, यह आयोजन वर्षों से पाल्हेपुर क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान बना हुआ है। ऐसी मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन बूढ़ा माता के दर्शन करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
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