उन्नाव।बांगरमऊ के श्री दुर्गेश्वर कृष्ण लीला समिति के तत्वाधान में आयोजित 74वें कृष्ण लीला महोत्सव के तृतीय दिवस में भक्त चरित्र मीराबाई लीला का दर्शन ब्रिज से पधारे लीलाधारियों द्वारा कराया गया। मंच पर पहुंचकर पंडित रविशंकर दीक्षित महाराज जी ने ठाकुर जी की आरती उतार कर एवं पूजन कर लीला का शुभारंभ कराया।
भक्ति मति मीरा जी के चरित्र का दर्शन कराते हुए कलाकारों नें मीरा कौन थी बताया कि ब्रज की एक श्यामा नाम की गोपी थी और जिस समय वो अपनी ससुराल जा रही है उस समय मां ने कहा बेटी कन्हैया को मुंह मत दिखाना। एक बार जो मुंह देख लेता है वो बस उनका ही हो जाता है। अपनी मां की बात को मान के श्यामा गोपी ने अपना मुंह ठाकुर जी को नहीं दिखाया। श्री ठाकुर जी बोले एक दिन तू मेरा मुख देखने को तरसेगी और जिस समय ठाकुर जी ने गोवर्धन पर्वत को उठाया उस समय इस गोपी ने ठाकुर जी के दर्शन किए और कहा मुझसे भूल हो गई आप मुझे कब मिलोगे।ठाकुर जी ने कहा तू कलयुग में मीरा के नाम से जन्म लेके आएगी तभी तुझको मैं प्राप्त हो जाऊंगा वो ही गोपी मीरा बनीं।मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरों न कोई जाके सिर मोर मुकुट मेरो पति सोई। और
मीरा जी ने सब त्याग कर ठाकुर जी को चुना और श्री धाम वृंदावन मीरा जी आई उसके बाद द्वारकाधीश में जाके लीन हो गई।
लीला में प्रज्वल शर्मा वैभव शर्मा वीर तिवारी हरिओम तिवारी सोनू दीक्षित आदि लोगों ने व्यवस्था संभाली।
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