शिवली,कानपुर देहात। दीपावली के पावन पर्व पर भाई बहन के प्यार के प्रतीक भैया दूज पूरे क्षेत्र में उत्साह और उमंग के साथ धूमधाम से मनाया गया। बहनों ने भाइयों का तिलक कर मुंह मीठा करवाया तथा अपनी रक्षा का वचन लिया। तमाम कहानियों से जोड़कर मनाए जाने वाले इस पर्व पर घर घर परंपरा अनुसार भूमि पर देवी देवताओं और भाई बहनों के रेखाचित्र खींचे गए। तथा बुजुर्ग महिलाओं ने कथा सुनाकर पर्व की महत्ता का बखान किया। भैया दूज की रौनक सड़कों पर देखने को मिली।
भाई बहन के प्यार का प्रतीक भैया दूज का पर्व परंपरागत रूप से शिवली कस्बा समेत आसपास क्षेत्र में धूमधाम के साथ मनाया गया। इस पर्व पर बहनों ने भाइयों को तिलक कर मिठाई खिलाई और उनके दीर्घायु की कामना की तथा भाइयों ने बहनों की रक्षा के लिए संकल्प लिया। भैया दूज के मौके पर बहनों ने सुबह से ही रीत रिवाज के अनुसार पूजन अर्चन किया इसके बाद भाइयों को तिलक लगाकर मिठाई खिलाई। भाइयों ने भी बहनों को उपहार भेंट किए। भैया दूज के मौके पर कस्बे में खासी चहल-पहल दिखाई पड़ी सुबह से ही बहनों को अपने भाइयों के घर तिलक लगाने को जाने का सिलसिला शुरू हो गया था। भैया दूज के पर्व के महत्व के बारे में पूछे जाने पर बुजुर्गों ने बताया कि पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान सूर्य देव के दो पुत्र शनि एवं एवं तथा चार पुत्रियां ताप्ती भद्रा कालिंद्री व सावित्री थीं। उक्त है संतानों को जन्म देने के बाद सूर्य की पत्नी संज्ञा हिमालय पर्वत पर तपस्या करने के लिए चली गई थीं। संज्ञा की खोज में उनका पुत्र यम भी निकल पड़ा तथा अपनी बहन कालिंद्री से हर साल भैया दूज के दिन आने एवं उसके हाथ से बने पकवान खाने का वचन दिया। तभी से यह पर्व परंपरागत ढंग से मनाया जाता है। भैया दूज के दिन हर भाई को बहन से तिलक करा कर उसकी रक्षा का संकल्प लेना चाहिए ताकि हमारी प्राचीन संस्कृति को बचाया जा सके।




