रामलीला महोत्सव में भरत मिलाप के दृश्य का मंचन किया गया

0
106

उन्नाव ।गंजमुरादाबाद में चल रहे राम लीला महोत्सव में शाम को सबसे पहले श्री राम जानकी राम लीला मंडल द्वारा भरत मिलाप के दृश्य का मंचन किया गया जिसमें भरत एव शत्रुघ्न अपने ननिहाल से अयोध्या पहुंचते हैं तो वहा पर राम लक्ष्मण एवं सीता को ना पाकर बैचेन हो जाते हैं। उन्हें पता लगता है कि राम को वनवास दिया गया है जिस कारण उन्होंने भी राम के साथ वनों में रहने का निर्णय लिया और राज गद्दी को छोड़ दिया। वन-वन भटकते हुए राम के पास पहुंचते हैं तो लक्ष्मण कहते है कि भरत कहीं हम पर सेना लेकर हमला करने तो नहीं आ रहे है इस पर राम ने समझाया और कहा कि वह हमारी सुधी लेने आया होगा। भरत मिलाप का दृश्य देख सब की आखें नम हो गई। इसके बाद राम को पता चलता है कि पिता का स्वर्गवास हो गया है। इसके बाद भरत को घर जाने को कहा। भरत अड़ गये। राम के समझाने पर भरत ने राम की खड़ाऊं अपने साथ ले गये। इसके बाद मंचन में आगे दिखाया गया सूपनखा जंगल में घूम रही थी। उसी समय उसकी नजर राम और लक्ष्मण पर पड़ी उसका मन उनसे शादी करने को करने लगा और वह राम के पास गई तो राम ने टाल दिया कि वह उस को पटरानी नहीं बना सकते उन्होंने एक ही शादी का निर्णय लिया है। इस पर वह लक्ष्मण पर डोरे डालने लगी। लक्ष्मण ने कहा कि अगर बड़े भैया इजाजत दें तो ही शादी करुंगा। इस के बाद राम के पास गई और राम ने कुछ लिख कर दिया जिस के बाद लक्ष्मण ने उस की नाक-कान काट दिया। नाक काटने की दर्द से चिल्लाती हुई वह अपने भाइयों खर और दूषण के पास गई उन्होंने बदला लेने के लिये युद्ध किया दोनों का बध राम ने कर दिया। इसके बाद रावण के पास गई और बताया कि वन में राम लक्ष्मण और सीता आई हैं। सीता का नाम सुनते ही रावण सोचने लगा कि स्वयंवर में तो नहीं जीत पाया अब उसे अपनी पटरानी बनाकर रहूंगा। मारीच को सोने का हिरन बना कर स्वयं भिक्षुक बन रावण सीता का हरण करता है। रास्ते में सीता के राम-राम चिल्लाने की आवाज सुन कर जटायु गिद्ध सीता को छुड़ाने आता है तो उसका पंख रावण काट देता है और सीता को लेकर लंका चला जाता है। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारी सहित बड़ी संख्या में दर्शक उपस्थित रहे।


LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here