लिखा न बिधि बैदेहि बिबाहू,त्रिपुरारपुर में सैकड़ों लोगों ने देखी धनुष लीला

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पुरवा,उन्नाव।प्रण पूर्ति न हो तो निराशा स्वाभाविक है,निराश मन व्यथित होता है और आक्रोश पनपता है।हालात से वाकिफ नृप जनक ने कह दिया तज़हु आस निज निज गृह जाहू। लिखा न बिधि बैदेहि बिबाहू ।बाबा लिखते हैं जनक की वाणी और सुअवसर की प्रतीक्षा कर रहे गुरु वशिष्ठ ने राम से कहा उठहु राम भंजहु भव चापा गुरु की आज्ञा पाकर राम ने अजगव को खंडों में विभाजित कर दिया अजगव के खंडित होते ही महेन्द्रा चल छोड़ भृगु ऋषि मिथिला पहुंचे बाबा लिखते हैं उन्होंने घोषणा की सो बिलगाउ बिहाइ समाजा धनुष तोड़ने वाला समाज से अलग हो जाए। त्रिपुरारिपुर में सम्पन्न दो दिवसीय वीर रस प्रधान धनुष लीला का दर्शकों ने भरपूर आनंद लिया।
गत कई वर्षों से शिक्षक बी के मास्टर की अगुवाई में दो दिवसीय सांस्कृतिक आयोजन की परम्परा है यहां नामचीन कलाकारों का संगम,आगंतुकों के प्रति आदर आयोजन की खास खूबियों में है।कन्या भोज से प्रारंभ कार्यक्रम लक्ष्मण परशुराम संवाद तक होता है।दूसरे दिन की वीर रस प्रधान लीला में दर्शकों ने जहां रावण बाणासुर जैसे योद्धाओं का कौशल देखा वहीं प्रण पूर्ति न होने से निराश विदेह के विलाप ने सबकी आंखे नम कर दी। जाहिर है जब किसी परिवार में बिटिया के हाथ पीले होते होते रह जाएं ऐसे में परिवार खास तौर पिता की दशा विदेह हो ही जायेगी।
दो दिवसीय धनुष लीला की विशेषताओं
दर्शकों का कहना था कि जनक की भूमिका निभा रहे अभिनेता ने अभिनय को सजीव कर दिया रावण बाणासुर की भूमिका भी कम नहीं रही इससे भी आगे लक्ष्मण की भूमिका निभा रहे सुरेश बाबू पिपरौंधा व परशुराम की भूमिका निभा रहे कुलदीप शास्त्री का तार्किक संवाद की चर्चा हमेशा होगी दोनों विद्वानों की विद्वता में कोई सवाल नहीं किया जा सकता।खास यह कि दो दिवसीय आयोजन में जहां हजारों की तादात में ग्रामीण लीला देखने पहुंचे वहीं खास मेहमानों में विधायक आशुतोष शुक्ल, उदल फौजी, पूर्व अध्यक्ष गोविंद शुक्ल,राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ अवध प्रांत के प्रचार प्रमुख डॉ अशोक दुबे, नर सेवा नारायण सेवा के संस्थापक विमल द्विवेदी,समाज सेवी रज्जन यादव,अनिल तिवारी,विमल बाजपेई,रोहित शुक्ल, आदि रहे।

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