उन्नाव।उपनिदेशक कृषि श्री रविचन्द्र प्रकाश ने बताया है कि मा0 सर्वोच्च न्यायालय तथा मा0 राष्ट्रीय हरित अधिकरण द्वारा फसल अवशेष को खेतों में जलाना दंडनीय अपराध घोषित है। फसलों के अवशेष जलाये जाने से उत्पन्न हो रहे प्रदूषण की रोकथाम के दृष्टिगत जनपद स्तर, तहसील स्तर एवं विकासखण्ड स्तर पर सेल का गठन करते हुये प्रत्येक दिन अनुश्रवण किया जा रहा है। खरीफ सत्र की फसलें जैसे धान, मक्का, गन्ना आदि फसलों के अवशेष/पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए जिला प्रशासन सख्त कार्रवाई कर रहा है, जिसमें पराली जलाने वाले किसानों पर जुर्माना लगाना, एफआईआर दर्ज करना, और उन्हें सरकारी योजनाओं से वंचित करना शामिल है। सैटेलाइट द्वारा पराली जलाने की प्रत्येक घटनाओं की निगरानी की जा रही है। पराली जलाने की घटना पाये जाने पर सम्बन्धित को दण्डित करने के सम्बन्ध में राजस्व विभाग के शासनादेश संख्या 1618/1-9-2017-10-9, दिनांक 13.11.2017 द्वारा राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम की धारा-24 के अन्तर्गत क्षतिपूर्ति की वसूली एवं धारा-26 के अन्तर्गत उल्लंघन की पुनरावृत्ति होने पर सम्बन्धित के विरुद्ध अर्थदण्ड इत्यादि की कार्यवाही की जायेगी । पराली जलाने की घटना होने पर सम्बन्धित क्षेत्राधिकारी, पुलिस एवं उपजिलाधिकारी के द्वारा नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही कराई जायेगी। किसानों को पराली न जलाने और इसके बजाय खाद बनाने या नजदीकी गौशालाओं में दान करने की सलाह दी जा रही है। कम्बाइन हार्वेस्टर मालिकों को शासन के निर्देशानुसार सुपर स्ट्रा मैनेजमेन्ट सिस्टम अथवा स्ट्रा रीपर अथवा स्ट्रा रेक एवं बेलर अथवा अन्य कोई फसल अवशेष प्रबन्धन यन्त्र का उपयोग किया जाना अनिवार्य होगा। उक्त व्यवस्था बगैर कोई भी कम्बाइन हार्वेस्टर से कटाई नहीं होगी। कृषि विभाग/राजस्व विभाग/ग्राम्य विकास विभाग के क्षेत्रीय कर्मचारी उक्त व्यवस्था अनुसार कटाई कार्य का पर्यवेक्षण करेंगे। यदि कोई भी कम्बाइन हार्वेस्टर बिना सुपर स्ट्रा मैनेजमेन्ट सिस्टम अथवा स्ट्रा रीपर अथवा स्ट्रा रेक एवं बेलर अथवा अन्य कोई फसल अवशेष प्रबन्धन यन्त्र के चलती हुई पायी जायेगी तो उसको तत्काल सीज कराते हुये कम्बाइन मालिक के स्वयं के खर्चे पर सुपर स्ट्रा मैनेजमेन्ट सिस्टम लगवाकर ही छोड़ा जायेगा। किसानों को पराली जलाए बिना उसे खाद बनाने या गोशालाओं में दान करने के लिए न्याय पंचायत स्तरीय गोष्ठियों के माध्यम से प्रोत्साहित किया जा रहा है। कृषक फसल अवशेष प्रबन्धन हेतु वर्मी कम्पोस्ट गड्ढे बनवाकर, उसमे पराली डालकर बायो डिकम्पोजर का प्रयोग कर पराली से खाद बना सकते हैं। कृषक बायो डिकम्पोजर का प्रयोग कर पराली को खेत में ही सड़ाकर खाद बना सकते हैं। फसल अवशेष संग्रहित करने हेतु एग्रीगेटर के रुप मे कार्य करने वाले एफ0पी0ओ0 को भी फसल अवशेष उपलब्ध करा सकते हैं। फसल अवशेष प्रबंधन हेतु यंत्रों को सुगमता से उपलब्ध कराने हेतु कस्टम हायरिंग सेन्टर एवं फार्म मशीनरी बैंक स्थापित किये गये हैं यहीं से किसान भाई किराये पर यंत्र प्राप्त अपने खेत की पराली का प्रबंधन कर सकते हैं। मा0 सर्वोच्च न्यायालय तथा मा0 राष्ट्रीय हरित अधिकरण के निर्देशानुसार पराली जलाने पर जुर्माना राशि को दोगुना कर दिया है, जो छोटे किसानों से लेकर बड़े किसानों तक के लिए लागू होता है। पराली जलाने पर जुर्माना इस प्रकार है। दो एकड़ से कम जमीन वाले किसान 5,000 रुपये का जुर्माना, दो से पांच एकड़ जमीन वाले किसान 10,000 रुपये का जुर्माना एवं पांच एकड़ से अधिक जमीन वाले किसान 30,000 रुपये का जुर्माना निर्धारित किया गया है।
कृषि विभाग की तरफ से किसानों से अपील की जाती है कि वे पराली को न जलाएं और इसके बजाय उसे खेतों में मिलाकर खाद बनाएं या उसे नजदीकी गोशालाओं में दान कर दें, जिससे पर्यावरण, मृदा स्वास्थ्य एवं मानव स्वास्थ्य पर विपरित प्रभाव न पड़े।




