भक्ति भजन बचपन से ही प्रारंभ करें बुढ़ापे के भरोसे न रहें

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बांगरमऊ,उन्नाव।नगर बांगरमऊ में चल रही श्री मद भागवत कथा में श्री भारत भूषण जी ने सृष्टि का वर्णन किया और बताया भागवत मृत्यु के भय से मुक्त कर देती है। राजा परीक्षित ने पूछा गुरुदेव जल्दी मरने वाले व्यक्ति को क्या करना चाहिए।शुकदेव जी ने बताया जो भी जीवन की स्वास है प्रत्येक स्वास पर नाम स्मरण कीजिए नाम धन जिनके पास है वहीं सबसे बड़े धनी है।आगे श्री व्यास ने बताया कपिल देवहूति संवाद में माता देवहूति ने पूछा कि बेटा मेरे पिता महाराज मनु बाबा स्वयं ब्रह्म जी परबाबा स्वयं नारायण मेरा बेटा स्वयं भगवान फिर मै सुखी नहीं हूं मैं सुखी कैसे रहूं ,कपिल भगवान कहते है मां संसार में सुखी रहना है तो आप अपनी दृष्टि समान रखिए सिय राम मय सब जग जानी, करहूं प्रणाम जोर जुग पानी। प्रत्येक भूतात्मा में परमात्मा का दर्शन कीजिए।ध्रुव जी का चरित्र श्रवण कराया महाराज जी ने बताया कि भक्ति भजन बचपन से ही प्रारंभ करें बुढ़ापे के भरोसे न रहें कि बुढ़ापे में भजन करेंगे जो करना है प्रारंभ से कीजिए जैसे ध्रुव जी ने बाल्यकाल में ही भगवान को प्राप्त कर लिया। इसी के साथ महाराज जी ने बताया कलयुग में नाम से बड़ा कोई नहीं है कलयुग केवल नाम आधारा। नगर के मोहल्ला खतरना में स्थित महिला सत्संग भवन में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के आयोजन में यजमान अशोक रस्तोगी पत्नी अलका रस्तोगी, कृष्ण कुमार रस्तोगी, निर्मल रस्तोगी, हर्षित रस्तोगी, रचना रस्तोगी, नमन, सुमित, खुशबू व वर्षा ने आरती उतारी व प्रसाद वितरित किया।

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