स्पोर्टर्स इंजरी पर इंडियन ऑर्थोस्कोपी सोसाइटी ने आयोजित की संगोष्ठी

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कानपुर। इंडियन ऑर्थोस्कोपी सोसाइटी एवं कानपुर ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन के द्वारा घुटने की स्पोर्टर्स इंजरी के संबंध में चर्चा के लिए होटल रॉयल क्लिफ में एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी में घुटने के स्पोटर्स इंजरी के ऑर्थोस्कोपी विधि द्वारा निदान एवं उपचारों के नवीनतम तकनीकों की बारीकियों के बारे में विस्तारपूर्वक बताया गया।
संगोष्ठी का शुभारंभ डॉ पुणे से डा० पराग संचेती, कलकत्ता से डॉ० राजीव रमण ( इंडियन ऑर्थोस्कोपी सोसाइटी ,सचिव ), मदुरई से डॉ० के० एन० सुब्रमणियन, के०जी०एम०यु० के डॉ० आशीष कुमार, आगरा से डॉ० अरुण गुप्ता ने दीप प्रज्वलन कर किया। स्पोर्ट्स इंजरी के बारे में डॉ पराग संचेती ने बताया कि (आईएएस) कार्यक्रम के तहत यूपी के विभिन्न जनपदों से आए डॉक्टरो द्वारा आर्थ्रोस्कॉपी ट्रेनिंग कानपुर में विस्तारित की जा रही है। उन्होंने बताया किसका मुख्य उद्देश्य नई तकनीकियों से मरीजों का बेहतर इलाज करना और नई तकनीकी के बारे में जानकारी देना है। इसी क्रम में जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज अस्थि रोग विभाग के वरिष्ठ चिकित्सकडॉ चंदन कुमार ने बताया कि घुटने की जो स्पोर्ट्स इंजरी होती है उसका डायग्नोज करना और उसका इलाज करना इसके साथ ही जो भी तकनीकी आई है उसके माध्यम से लोगों जागरूक करना और ऐसे स्पोर्ट्स इंजरी का सफलतापूर्वक इलाज करना इसी विषय पर इस संगोष्ठी का आयोजन किया गया है ताकि आने वाले भविष्य में नए वीडियो से इन स्पोर्ट्स इंजरी का बेहतर और सरल तरीके से इलाज किया जा सके। इसी क्रम में डॉ अरुण गुप्ता ने घुटने के ए०सी०एल०, पी०सी०एल०, कोलेटरल लिगामेंट, मल्टीलिगामेंट, मेनिस्कस एवं कार्टिलेज की चोटों के पहचान एवं उपचार के तरीकों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि लिगामेंट अक्सर एक्स-रे में नहीं आता है जिसके लिए मरीज की एमआरआई की जाती है ताकि पता चल सके कि लिगामेंट कितना टूटा है और कितना क्षतिग्रस्त हुआ है। इस कार्यक्रम में मदुरई से डॉ० के० एन०सुब्रमणियन, के०जी०एम०यु० के डॉ० आशीष कुमार, आगरा से डॉ० अरुण गुप्ता ने सम्मिलत होकर व्याख्यान दिए। कार्यक्रम का आयोजन डॉ० चन्दन कुमार (आर्गनाइजिंक सेक्रेटरी), जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के अस्थि रोग विभागाध्यक्ष डॉ संजय कुमार, डॉ० निर्भय सक्सेना (के० ओ० ए० प्रेसिडेंट), डॉ० अजीत तिवारी (के० ओ० ए० सचिव) एवं कानपुर ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन के तमाम सदस्यों ने किया।


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