उन्नाव।अपर जिला कृषि अधिकारी अनुराग कुमार ने बताया है कि वर्तमान समय में अधिक मात्रा में फसलों में प्रयोग किये जा रहे रासायनिक उर्वरकों के परिणामस्वरूप मिट्टी, हवा, पानी, मानव स्वास्थ्य, पौधों के स्वास्थ्य, जैव विविधता पर विपरीत प्रभाव पड रहा है। अत्याधिक मात्रा में रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग से निम्नलिखित दुष्प्रभाव पड रहे हैं-नाइट्रोजन धारी उर्वरकों की फसल उत्पादन सीमित करने में अधिक भूमिका है। उपयोग की गयी 60 प्रतिशत नाइट्रोजन भूमि में जमा हो जाती है, जो लीचिंग या डीनाइट्रीफिकेशन द्वारा वातावरण में चली जाती है, जिसका पौधे उपयोग नही कर पाते है। अधिक मात्रा में यूरिया/नाइट्रोजन धारी उर्वरकों के प्रयोग से पानी और भोजन में नाइट्रेट आयॅन की अधिकता के कारण शिशुओं में मिथमोग्लोबिनीमियाॅ होने की संभावना अधिक रहती है। अधिक मात्रा में नत्रजनधारी उर्वरकों के प्रयोग से मनुष्यों के साथ ही साथ पशुओं में भी कैंसर पैदा करने वाले पदार्थों का निर्माण करता है। अधिक मात्रा में नत्रजनधारी उर्वरकों के प्रयोग से फसलों में रोग एवं कीटों के लगने की संभावना अधिक बढ जाती है। अधिक मात्रा में फसलों में रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग से भूजल एवं सतही जल दोनो प्रदूषित हो रहे हैं। पीने के पानी में नाइट्रेट एक स्वास्थ्य समस्या माना जाता है। नाइट्रेट शरीर में नाइट्राइट में परिवर्तित होकर हिमोग्लोबीन का आक्सीकरण करता है, जिससे रक्त आक्सीजन का परिवाहन करने में असमर्थ हो जाता है। नाइट्रोजनधारी उर्वरको के अधिक प्रयोग से नाईट्राइट द्वारा 6 महीनो तक के बच्चों मे ब्लू आयं सिंड्रोम हो जाता है। किसान भाइयों को सलाह दी जाती है कि मिट्टी की जाॅच कराकर संस्तुत मात्रा के अनुसार रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग विभाजित खुराक (स्पिलिट डोज ) के रूप में करें, साथ ही साथ फसल अवशेषों का पुनःचक्र करें, तथा हरी खाद के रूप में ढैंचा, सनई, उर्द, मूॅग की फसलों का प्रयोग करें, तथा फसलचक्र को अवश्य अपनायें।




