रासलीला के मंचन में कृष्ण सुदामा की मित्रता को देख भाव विभोर हो गए भक्त,कृष्ण भगवान के जय घोष के साथ कंस का हुआ वध

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अमौली,फतेहपुर। कस्बे गायत्री मंदिर प्रांगण में मैदान में आयोजित भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव पर चल रही छ: दिवसीय रासलीला के अंतिम दिन निम्बार्क रासलीला मंडली द्वारा दोपाहर की लीला में कृष्ण सुदामा की मित्रता की अटूट गाथा का पाठ किया गया। वहीं रात्रि और अंतिम लीला में मथुरा के राजा कंस वध का पाठ किया गया। लीला के माध्यम से दिखाया गया कि कंस मथुरा का राजा था और वह बहुत ही क्रूर और अन्यायी था जिसके चलते भगवान श्री कृष्ण और बलराम ने अत्याचारी कंस का वध कर डाला। पहले कंस ने अपने पिता उग्रसेन को जेल में कैद कर दिया था और वह छल से खुद मथुरा का राजा बन गया। कंस बहुत ही अत्याचारी था और देवकी के आठवें पुत्र से डरता था, जिसे भविष्यवाणी में बताया गया था कि वही आठवां पुत्र उसका वध करेगा। भगवान कृष्ण का जन्म जेल में देवकी और वासुदेव से होने के बाद जेल के ताले टूट गये और वासुदेव ने उन्हें गोकुल पालन पोषण हेतु नंद बाबा के यहां छोड़ दिया था। जहां भगवान कृष्ण बड़े होकर मथुरा आए और अत्याचारी कंस के अखाड़े में पहुंचे। वहां उन्होंने कंस के पहलवानों जैसे चाणूर और मुष्टिक को मार गिराया और अंत में कंस का भी वध किया। वध होते ही दर्शकों ने भगवान श्री कृष्ण के जयकारे लगाने लगे। कंस वध की लीला भगवान कृष्ण की शक्ति और उनके धर्म की रक्षा के लिए किए गए कार्यों को दर्शाती है। रासलीला कार्यक्रम का आयोजन रमेशचंद्र गुप्ता, अनिल कुमार ओमर, सौरभ गुप्ता, शुभम गुप्ता, सुमित गुप्ता इत्यादि परिवारिक जनों ने किया। जहां उपस्थित लोगों ने भगवान श्री कृष्ण की लीला के दर्शन कर रासलीला का आनंद लिया।

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