कामयाब कोटा अभियान,डिनर विद कलेक्टर में छात्राओं के साथ संवाद,मेहनत,अच्छी संगत और नशे से दूरी सफलता की कुंजी कलेक्टर 

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कोटा,राजस्थान। कामयाब कोटा अभियान,डिनर विद कलेक्टर में छात्राओं के साथ संवाद,मेहनत,अच्छी संगत और नशे से दूरी सफलता की कुंजी कलेक्टर याब कोटा” अभियान के तहत एक बार फिर जिला कलक्टर डॉ रविंद्र गोस्वामी शुक्रवार को कोचिंग विद्यार्थियों के बीच पहुंचे। लैंडमार्क सिटी, कुन्हाड़ी स्थित गुरुकुल प्रतिभा गर्ल्स हॉस्टल में कोचिंग छात्राओं के साथ डिनर करते हुए संवाद किया। अपने अनुभवों से उन्हें गहरी सीख देते हुए मनोबल बढ़ाया।

छात्राओं ने पढ़ाई में आने वाली समस्याओं और जिज्ञासा के बारे में प्रश्न पूछे जिनका डाॅ गोस्वामी ने बड़ी सहजता के साथ स्वयं के उदाहरण देते हुए समाधान प्रस्तुत किए। सफलता के मंत्र भी दिए।
उन्होंने कहा कि शंकाएं,समस्याएं और नकारात्मकता सहज प्रवृत्तियां हैं लेकिन इन पर सकारात्मकता और आत्मविश्वास से विजय पानी होगी। उन्होंने गीता में श्री कृष्ण अर्जुन संवाद से भी छात्रों को प्रेरणा दी।
उन्होंने कहा कि लक्ष्य के प्रति ईमानदार मेहनत,अच्छी संगत और नशे से दूरी यदि है तो सफलता अवश्य मिलेगी। छात्रों के आग्रह पर जिला कलेक्टर ने गीत भी सुनाए।
छात्राओं द्वारा मन नहीं लगने,पढ़ाई के दौरान भटकाव और एकाग्रता की कमी के सवाल पर उन्होंने बताया कि कोटा कोचिंग में एडमिशन के बाद मन नहीं लगने पर वे तीन दिन में ही वापस चले गए परन्तु घर जाकर पूरी मेहनत से पढ़ाई की। फिर भी उस साल नीट पास नही कर पाए। विफलता से गलतियों को सुधारते हुए पुनः प्रयास किया और सफलता मिली।पीएमटी से यूपीएससी के सफर से जुड़े सवाल पर डॉ गोस्वामी ने कहा कि डॉक्टर के रूप में मरीजों की सेवा का मौका मिला लेकिन असहाय की मदद न कर पाने की टीस ने प्रशासनिक सेवा में रुचि जगाई और लक्ष्य के प्रति ईमानदार मेहनत से यह मुकाम पाया।
उन्होंने कहा , इम्तिहान जीवन का हिस्सा है,जीवन नहीं। यदि सफलता नहीं मिलती तो हारें नहीं। गलतियों से सीखकर आगे बढ़ना चाहिए। सिली मिस्टेक्स से कैसे बचें के सवाल पर उन्होंने कहा कि अधिकाधिक प्रेक्टिस से इसमें सुधार संभव है।
ज्यादा देर नहीं पढ़ पाने,पढ़ा हुआ याद ना रहने पर होने वाले तनाव से कैसे निपटा जाए के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि अपने अटेंशन स्पान को पहचानते हुए उतना ही लक्ष्य रखें और उसके पूरा होने पर खुद को खुश करने वाले कार्य करें।

अभिभावकों द्वारा दूसरों से तुलना करने और उनकी अपेक्षाओं पर खडा उतरने के प्रश्न पर उन्होंने कहा, माता-पिता सबसे बड़े शुभचिंतक है। उनके द्वारा किसी से तुलना करना महज आपके श्रेष्ठ भविष्य की चिंता मात्र है।उनसे प्रतिदिन अपनी बातें शेयर करें।
जिला कलक्टर के साथ डिनर कार्यक्रम में कोचिंग छात्राओं ने खुलकर अपनी बात रखी। कलेक्टर ने स्ट्रेस दूर करने, कमजोर विषय पर फोकस करने, सोशल मीडिया का सीमित उपयोग करने, नकारात्मकता से बचने के संबंध में सुझाव दिए। जैसे
खुद को मोटिवेट रखने के लिए पढ़ाई के बीच अपनी पसंद की एक्टिविटी के लिए समय निकालें। छोटे-छोटे ब्रेक लें। पर्याप्त नींद लें।
संवाद के दौरान अध्यक्ष, चंबल हाॅस्टल एसोसिएशन अध्यक्ष विश्वनाथ शर्मा, उपाध्यक्ष मनीष मूंदडा एवं हॉस्टल संचालक दिवाकर जैन मौजूद रहे।


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