फतेहपुर।जिले के भिटौरा विकास खण्ड के दर्जनों गांवों के जलमग्न होने से हजारों बीघा धान की फसल बर्वाद हो गई। इस बर्वादी का कारण सिंचाई प्रखण्ड में कार्यरत जिम्मेदार हैं। ग्राम पंचायत उन्नौरा (सहिमापुर) के ग्राम प्रधान जमुना सिंह बीते मई माह से से लगातार उच्चाधिकारियों को पत्र के माध्यम से नहर पटरी व साईफन मरम्मत की आवाज उठाते रहे, लेकिन किसी भी अधिकारी के कान में जूं तक नहीं रेंगा। नतीजा रहा कि बीते दिन नहर पटरी में खांदी कट गई और पानी ने अपना बिकराल रूप धारण करते हुये एक हजार बीघा से अधिक धान की फसल को अपने आगोस में लिया। किसान अपनी बर्बादी पर आंसू बहाने के अलावा कुछ करने की स्थिति में नहीं है। प्रकरण पर अधिशाषी अभियन्ता सिंचाई प्रखण्ड के मोबाईल नंबर पर बात करने का प्रयास किया, लेकिन उनका फोन रिसीव नहीं हो सका।
खांदी कटने से भरे पानी का दृश्य।
गौरतलब है कि ग्राम पंचायत उन्नौर (सहिमापुर) जमुना सिंह ने पहला पत्र बीती 6 मई को अधिशाषी अभियन्ता सिंचाई खण्ड को देते हुये जेसीबी से सिल्ट सफाई के दौरान साईफन के क्षतिग्रस्त होने की बात कहते हुये उसके मरम्मतीकरण की आवाज उठाई, लेकिन बेपरवाह अधिकारी की उदासीनता के चलते पत्र पर कोई कार्यवाही अमल में नहीं लाई गई। इसके बाद 31 जुलाई को ग्राम प्रधान ने जिलाधिकारी को एक शिकयती पत्र दिया जिसमें आरोप लगाया कि साईफन का मरम्मतीकरण कार्य नहीं कराये जाने के कारण नहर में डोलेपुर गांव के समीप 30 जुलाई को खांदी कट जाने से एक हजार बीघा से अधिक की धान की फसल किसानो की बर्बाद हो गई। ग्राम प्रधान का आरोप है कि समय पर अगर साइफन का मरम्मतीकरण हो गया होता तो उसके द्वारा अधिक पानी सीधे गंगा नदी में चला जाता और इतने बड़े पैमाने पर किसानों की बर्वादी नहीं होती। जिला अधिकारी ने उक्त शिकायत की जांच के आदेश एसडीएम सदर व अधिशाषी अभियन्ता निचली गंगा नहर को दिया है। आज फिर ग्राम प्रधान ने करीब एक सैकड़ा किसानों व पडोसी ग्राम प्रधानों का हस्ताक्षरयुक्त शिकायती पत्र जिलाधिकारी को देते हुये किसानों की फसल के नुकसान का मुआवजा दिलाने तथा साईफन मरम्मतीकरण की मांग की है।




